बेटे को गृह ज़िला में नौकरी करते देखने का सपना देखते मां गुजर गई: बिहार के बेरोज़गार युवा ने रवीश को लिखा भावुक पत्र
“सब कुछ छोड़ कर दिल्ली से घर आ गया हूं. पिताजी की देखभाल के लिए. समझ नहीं आता क्या करें.”
“सब कुछ छोड़ कर दिल्ली से घर आ गया हूं. पिताजी की देखभाल के लिए. समझ नहीं आता क्या करें.”