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अन्य कहानियां

ग्राउंड रिपोर्ट: AMU में छात्रों के साथ अपराधियों-सा बर्ताव, बेरहमी से चले स्टन ग्रेनेड और लाठियां

स्टन ग्रेनेड का इस्तेमाल आतंकी हमलों के वक्त या बहुत नाजुक परिस्थितियों में होता है. छात्रों के साथ कभी इसका प्रयोग नहीं हुआ.

वाह रे BHU! आरक्षण से NET पास करने वाले छात्रों से छीन लिया असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का हक

विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार नीरज त्रिपाठी ने जवाब देने से बचते हुए अपने पीआरओ से बात करने की सलाह दी.

लखनऊ में सांप्रदायिकता और पितृसत्ता के ख़िलाफ़ जंग लड़ रहीं प्रो. रूप रेखा वर्मा और उनके संगठन “साझी दुनिया” को जानिए

करीब 20 साल की उम्र में समाज सेवा के क्षेत्र में कदम रखने वाली प्रोफेसर वर्मा 76 साल की उम्र में भी उसी जज़्बे के साथ लगी हुई हैं.

नया क़ानून बनाकर मजदूरों को गुलामी की ओर धकेल रही मोदी सरकार: नए लेबर कोड बिल के ख़िलाफ़ केंद्रीय ट्रेड यूनियन संगठनों ने किया धरना प्रदर्शन

“मोदी सरकार ‘वेतन संहिता विधेयक’ और ‘कार्यस्थल पर सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यस्थिति संहिता विधेयक लाकर मजदूरों के अधिकारों पर हमला कर रही है.”

RTI में संशोधन लोकतंत्र पर घातक प्रहार: मोदी सरकार के ख़िलाफ़ एकजुट हुए पूर्व सूचना आयुक्त

पूर्व आयुक्तों ने कहा कि इस संशोधन के जरिए सरकार सूचना आयोग की स्वतंत्रता और स्वायत्तता नियंत्रित करना चाहती है.

दिल्ली में फैक्ट्री हादसों में मजदूरों की मौत को लेकर श्रम मंत्री गोपाल राय के आवास के बाहर ट्रेड यूनियनों का विरोध प्रदर्शन

प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली की सभी फैक्ट्रियों की सुरक्षा ऑडिट और सम्बद्ध विभागों के अधिकारियों व ट्रेड यूनियनों की एक टीम के तत्काल गठन की मांग रखी है.

“कॉलेज में ना शिक्षक हैं ना किताबें, कैसे पढ़ें छात्र”: पिथौरागढ़ के पुस्तक-शिक्षक आंदोलन के समर्थन में दिल्ली में धरना प्रदर्शन

“नेता जी पलायन रोकना चाहते हैं विकास करना चाहते हैं, लेकिन पुस्तकालयों में किताबें और बच्चों को शिक्षा नहीं दे सकते.”

ग्राउंड रिपोर्ट: क्या ईंट भट्ठों पर काम करने वाले महादलितों को बंधुआ मज़दूरी से कभी मुक्ति मिल पाएगी?

न्यूज़सेन्ट्रल24×7 ने बिहार के गया ज़िले में कई गांवों के मज़दूरों से बात कर उनकी मजबूरियां और हालात जानने का प्रयास किया.

विकास का ढिंढोरा पीटने के नाम पर आम जनता के ऊपर हमला कर रही है मोदी सरकारः ‘रेलवे निजीकरण’ के ख़िलाफ़ मजदूरों और कर्मचारियों का धरना प्रदर्शन

प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार रेलवे को कॉर्पोरेट हाथों में देकर उनकी रोज़ी-रोटी छीन रही है.

राय

गांधी जी होते तो CAA विरोधी प्रदर्शनों का साथ देते

जिस तरह से देश की धर्म-निरपेक्षता और भाईचारे बचाने के लिए सभी मजहबों के लोग एकजुट हुए हैं, गांधीजी निश्चित रूप से इस आंदोलन का समर्थन करते.

आज आएगा अयोध्या मामले का फ़ैसला, बंद कर दें न्यूज़ चैनल और सामान्य रहें: रवीश कुमार

किसी एंकर के चिल्लाने से तनाव मत लीजिए. मुस्कुराइये. जो घबराया हुआ मिले उसे पकड़ कर चाय पिलाइये. कहिए रिलैक्स. टेंशन मत लो.

Fight Fake News.

अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों पर संकट, फैलेगी साम्प्रदायिकता की आग: मोदी सरकार 2.0 को लेकर कुछ सम्भावनाएँ और डर

यह सूची है उन कार्यों की जो मैं उम्मीद करता हूँ कि यह सरकार कभी ना करे. लेकिन साथ ही डरता भी हूँ कि ऐसा किया जाएगा.

ये मत पूछिए मोदी नहीं तो कौन, ये पूछिए मोदी फिर आएगा तो क्या होगा?- हर्ष मंदर

2019 में 2014 वाला विकास का पेड़ कट चुका है. उसके ‘अच्छे दिन’ के हरे पत्ते सूख कर झड़ चुके हैं. जो बचा है वो सिर्फ़ नफ़रत की शाखाएं हैं और जहर व अलगाववाद की जड़े हैं.

साध्वी प्रज्ञा की लोकसभा दावेदारी अपवाद नहीं- ये दौर सिर्फ़ बेशर्म राजनीति का दौर है

यह दावेदारी, संकल्प पत्र और ऐसे बयान यह इशारा करते हैं कि अगर इन्हें सत्ता पर दोबारा कब्ज़ा मिला तो पहले से ज़्यादा कट्टरपंथी राजनीति देखने को मिलेगी.

नए हिंदुस्तान का नया इंसाफ- गुरुग्राम की हिंसा आम हो चुकी हमारी बीमार सोच का हिस्सा है.

हर बार की तरह, यहां भी मज़लूम ही गुनहगार बन गया है. पुलिस ने पीड़ितों के खिलाफ़ भी केस दर्ज कर दिया है. वो अब हर तरह से टूट चुके हैं.

अभिव्यक्ति की आजादी को कुचलने का सरकारी हथियार है राजद्रोह कानून, अमेरिका जैसे देश से भी ख़त्म हो गई है इसकी उपयोगिता

भारतीय दंड संहिता में अन्य कई प्रावधान हैं. उनसे राज्य विद्रोही कार्यवाहियों के आरोपियों की मुश्कें कसी जा सकती है.

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कांचा इलैया आर्थिक-सामाजिक न्याय की ऐसी आवाज़ हैं जिसे दबाना नामुमकिन है!

इसमें कोई शक नहीं है कि हमारी यूनिवर्सिटियों में मौजूद सत्तापक्ष के लोग सत्ता की मदद से असरदार और अच्छे दलित विद्वानों को बाहर करने पर तुले हैं। उनकी लेखनी द्वारा उठाए गए प्रश्न सत्तापक्ष को असहज महसूस करवा रहे हैं।

गांधी जी होते तो CAA विरोधी प्रदर्शनों का साथ देते

जिस तरह से देश की धर्म-निरपेक्षता और भाईचारे बचाने के लिए सभी मजहबों के लोग एकजुट हुए हैं, गांधीजी निश्चित रूप से इस आंदोलन का समर्थन करते.

आज आएगा अयोध्या मामले का फ़ैसला, बंद कर दें न्यूज़ चैनल और सामान्य रहें: रवीश कुमार

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अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों पर संकट, फैलेगी साम्प्रदायिकता की आग: मोदी सरकार 2.0 को लेकर कुछ सम्भावनाएँ और डर

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शाहीनबाग़ का प्रदर्शन: सत्ता से सवाल पूछने का असाधारण मॉडल

हमें इस समय इन प्रदर्शनों से प्रेरणा लेकर अपनी आवाज़ को बाहर लाना होगा. यह समय है कि हम एकजुट होकर विरोध की आवाज़ को मजबूत करें.

ये मत पूछिए मोदी नहीं तो कौन, ये पूछिए मोदी फिर आएगा तो क्या होगा?- हर्ष मंदर

2019 में 2014 वाला विकास का पेड़ कट चुका है. उसके ‘अच्छे दिन’ के हरे पत्ते सूख कर झड़ चुके हैं. जो बचा है वो सिर्फ़ नफ़रत की शाखाएं हैं और जहर व अलगाववाद की जड़े हैं.

साध्वी प्रज्ञा की लोकसभा दावेदारी अपवाद नहीं- ये दौर सिर्फ़ बेशर्म राजनीति का दौर है

यह दावेदारी, संकल्प पत्र और ऐसे बयान यह इशारा करते हैं कि अगर इन्हें सत्ता पर दोबारा कब्ज़ा मिला तो पहले से ज़्यादा कट्टरपंथी राजनीति देखने को मिलेगी.

नए हिंदुस्तान का नया इंसाफ- गुरुग्राम की हिंसा आम हो चुकी हमारी बीमार सोच का हिस्सा है.

हर बार की तरह, यहां भी मज़लूम ही गुनहगार बन गया है. पुलिस ने पीड़ितों के खिलाफ़ भी केस दर्ज कर दिया है. वो अब हर तरह से टूट चुके हैं.

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CAA-NPR का हर हाल में बहिष्कार क्यों करें राज्य सरकारें?

अगर राज्य सरकारें अब भी एनपीआर को अपने यहां लागू करती हैं तो वो एक ऐसी प्रक्रिया में सहायक बनेंगी जिससे करोड़ों मुसलमानों का दमन होगा.

1947-2019: भारतीय वायुसेना ने कब-कब दुश्मनों के छक्के छुड़ाए, यहां पढ़ें

1971 में भारतीय सेना ने पाकिस्तान को दो टुकड़ों में बांट दिया और लगभग 90,000 पाकिस्तानी सैनिकों को युद्धबंदी बनाकर घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दिया.

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