ग्राउंड रिपोर्ट: “हम होली-दिवाली साथ में ही मनाते थे पर अब हिन्दुओं के मुहल्ले में डर लगता है”
कोरोना वायरस के प्रकोप से दिल्ली दंगा पीड़ितों के ऊपर दोहरी मार पड़ी है.
कोरोना वायरस के प्रकोप से दिल्ली दंगा पीड़ितों के ऊपर दोहरी मार पड़ी है.
कोरोना वायरस के प्रकोप से दिल्ली दंगा पीड़ितों के ऊपर दोहरी मार पड़ी है.
अपने भविष्य की अनिश्चितता को लेकर एसएससी के उम्मीदवारों ने NewsCentral24x7 से बातचीत की.
स्टन ग्रेनेड का इस्तेमाल आतंकी हमलों के वक्त या बहुत नाजुक परिस्थितियों में होता है. छात्रों के साथ कभी इसका प्रयोग नहीं हुआ.
विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार नीरज त्रिपाठी ने जवाब देने से बचते हुए अपने पीआरओ से बात करने की सलाह दी.
करीब 20 साल की उम्र में समाज सेवा के क्षेत्र में कदम रखने वाली प्रोफेसर वर्मा 76 साल की उम्र में भी उसी जज़्बे के साथ लगी हुई हैं.
“मोदी सरकार ‘वेतन संहिता विधेयक’ और ‘कार्यस्थल पर सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यस्थिति संहिता विधेयक लाकर मजदूरों के अधिकारों पर हमला कर रही है.”
पूर्व आयुक्तों ने कहा कि इस संशोधन के जरिए सरकार सूचना आयोग की स्वतंत्रता और स्वायत्तता नियंत्रित करना चाहती है.
प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली की सभी फैक्ट्रियों की सुरक्षा ऑडिट और सम्बद्ध विभागों के अधिकारियों व ट्रेड यूनियनों की एक टीम के तत्काल गठन की मांग रखी है.
“नेता जी पलायन रोकना चाहते हैं विकास करना चाहते हैं, लेकिन पुस्तकालयों में किताबें और बच्चों को शिक्षा नहीं दे सकते.”
न्यूज़सेन्ट्रल24×7 ने बिहार के गया ज़िले में कई गांवों के मज़दूरों से बात कर उनकी मजबूरियां और हालात जानने का प्रयास किया.
प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार रेलवे को कॉर्पोरेट हाथों में देकर उनकी रोज़ी-रोटी छीन रही है.
जिस तरह से देश की धर्म-निरपेक्षता और भाईचारे बचाने के लिए सभी मजहबों के लोग एकजुट हुए हैं, गांधीजी निश्चित रूप से इस आंदोलन का समर्थन करते.
कबीरदास, रविदास और नामदेव जैसे संत कवि भी रबाब नामक इस वाद्य यंत्र का इस्तेमाल करते थे.
किसी एंकर के चिल्लाने से तनाव मत लीजिए. मुस्कुराइये. जो घबराया हुआ मिले उसे पकड़ कर चाय पिलाइये. कहिए रिलैक्स. टेंशन मत लो.
यह सूची है उन कार्यों की जो मैं उम्मीद करता हूँ कि यह सरकार कभी ना करे. लेकिन साथ ही डरता भी हूँ कि ऐसा किया जाएगा.
देवरस से मुलाक़ात- हरिशंकर परसाई का एक व्यंग्य
2019 में 2014 वाला विकास का पेड़ कट चुका है. उसके ‘अच्छे दिन’ के हरे पत्ते सूख कर झड़ चुके हैं. जो बचा है वो सिर्फ़ नफ़रत की शाखाएं हैं और जहर व अलगाववाद की जड़े हैं.
यह दावेदारी, संकल्प पत्र और ऐसे बयान यह इशारा करते हैं कि अगर इन्हें सत्ता पर दोबारा कब्ज़ा मिला तो पहले से ज़्यादा कट्टरपंथी राजनीति देखने को मिलेगी.
हर बार की तरह, यहां भी मज़लूम ही गुनहगार बन गया है. पुलिस ने पीड़ितों के खिलाफ़ भी केस दर्ज कर दिया है. वो अब हर तरह से टूट चुके हैं.
भारतीय दंड संहिता में अन्य कई प्रावधान हैं. उनसे राज्य विद्रोही कार्यवाहियों के आरोपियों की मुश्कें कसी जा सकती है.
Help us hold the people in power accountable for as little as what you might spend on one social outing.
Support NC24x7भंवरी देवी का केस इस देश की पूरी सामाजिक-प्रशासनिक हक़ीक़त का आइना है.
इसमें कोई शक नहीं है कि हमारी यूनिवर्सिटियों में मौजूद सत्तापक्ष के लोग सत्ता की मदद से असरदार और अच्छे दलित विद्वानों को बाहर करने पर तुले हैं। उनकी लेखनी द्वारा उठाए गए प्रश्न सत्तापक्ष को असहज महसूस करवा रहे हैं।
जिस तरह से देश की धर्म-निरपेक्षता और भाईचारे बचाने के लिए सभी मजहबों के लोग एकजुट हुए हैं, गांधीजी निश्चित रूप से इस आंदोलन का समर्थन करते.
कबीरदास, रविदास और नामदेव जैसे संत कवि भी रबाब नामक इस वाद्य यंत्र का इस्तेमाल करते थे.
किसी एंकर के चिल्लाने से तनाव मत लीजिए. मुस्कुराइये. जो घबराया हुआ मिले उसे पकड़ कर चाय पिलाइये. कहिए रिलैक्स. टेंशन मत लो.
यह सूची है उन कार्यों की जो मैं उम्मीद करता हूँ कि यह सरकार कभी ना करे. लेकिन साथ ही डरता भी हूँ कि ऐसा किया जाएगा.
हमें इस समय इन प्रदर्शनों से प्रेरणा लेकर अपनी आवाज़ को बाहर लाना होगा. यह समय है कि हम एकजुट होकर विरोध की आवाज़ को मजबूत करें.
देवरस से मुलाक़ात- हरिशंकर परसाई का एक व्यंग्य
2019 में 2014 वाला विकास का पेड़ कट चुका है. उसके ‘अच्छे दिन’ के हरे पत्ते सूख कर झड़ चुके हैं. जो बचा है वो सिर्फ़ नफ़रत की शाखाएं हैं और जहर व अलगाववाद की जड़े हैं.
यह दावेदारी, संकल्प पत्र और ऐसे बयान यह इशारा करते हैं कि अगर इन्हें सत्ता पर दोबारा कब्ज़ा मिला तो पहले से ज़्यादा कट्टरपंथी राजनीति देखने को मिलेगी.
हर बार की तरह, यहां भी मज़लूम ही गुनहगार बन गया है. पुलिस ने पीड़ितों के खिलाफ़ भी केस दर्ज कर दिया है. वो अब हर तरह से टूट चुके हैं.
भारतीय दंड संहिता में अन्य कई प्रावधान हैं. उनसे राज्य विद्रोही कार्यवाहियों के आरोपियों की मुश्कें कसी जा सकती है.
अगर राज्य सरकारें अब भी एनपीआर को अपने यहां लागू करती हैं तो वो एक ऐसी प्रक्रिया में सहायक बनेंगी जिससे करोड़ों मुसलमानों का दमन होगा.
1971 में भारतीय सेना ने पाकिस्तान को दो टुकड़ों में बांट दिया और लगभग 90,000 पाकिस्तानी सैनिकों को युद्धबंदी बनाकर घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दिया.
भंवरी देवी का केस इस देश की पूरी सामाजिक-प्रशासनिक हक़ीक़त का आइना है.