May a good source be with you.

दिल्ली में फैक्ट्री हादसों में मजदूरों की मौत को लेकर श्रम मंत्री गोपाल राय के आवास के बाहर ट्रेड यूनियनों का विरोध प्रदर्शन

प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली की सभी फैक्ट्रियों की सुरक्षा ऑडिट और सम्बद्ध विभागों के अधिकारियों व ट्रेड यूनियनों की एक टीम के तत्काल गठन की मांग रखी है.

दिल्ली के औद्योगिक क्षेत्र में लगातार हो रही दुर्घटनाओं और मजदूरों की मौत को लेकर आज (16 जुलाई) को ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (AICCTU) समेत अन्य ट्रेड यूनियनों ने दिल्ली सरकार के श्रम मंत्री गोपाल राय के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया.

सभी ट्रेड यूनियनों ने गोपाल राय को संयुक्त ज्ञापन भी सौंपा. इस प्रदर्शन में औद्योगिक क्षेत्र के मज़दूरों के अलावा अन्य श्रमिकों ने भी हिस्सा लिया.

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए ऐक्टू-दिल्ली की सचिव श्वेता राज ने कहा, “श्रम मंत्री को फैक्ट्रियों में लगने वाली आग और मज़दूरों की मौत की ज़िम्मेदारी लेनी होगी. बवाना हादसे के बाद भी दर्जनों फैक्ट्रियों में आग लग चुकी है. इनमें से ज़्यादातर घटनाओं के वक़्त फैक्ट्रियों में बाहर से ताला लगा हुआ था. दिल्ली में इस तरह से मज़दूरों को मारना लगातार जारी है.”

दिल्ली के झिलमिल, नरेला और बवाना समेत कई इलाकों में फैक्ट्री में आग लगने के कारण कई मजदूर जिंदा जल गए. लेकिन, बावजूद इसके कई गैर-कानूनी फैक्ट्रियां दिल्ली में चलाई जा रही हैं. जिनमें बाहर से ताला मार दिया जाता है और मजदूर भीतर बंद होकर काम करते हैं. ऐसे में किसी अनहोनी के समय बाहर निकलने का रास्ता नहीं होता और मजदूर हादसे का शिकार हो जाते हैं.

न्यूज़सेन्ट्रल24×7  से बातचीत करते हुए नारायण सिंह ने कहा, “आप सरकार को सत्ता में आए साढ़े चार साल हो गए. लेकिन फिर भी दिल्ली में मजदूर मारे जा रहे हैं. यह बहुत शर्मनाक है. किसी न किसी कारखाने में आए दिन दुर्घटना हो रही है. सरकार मजदूरों के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रही है.”

(फ़ोटो- शिवानी भंडारी)

हिन्द मजदूर सभा (एच.एम.एस.) ट्रेड यूनियन के मोहम्मद ईशा ने कहा, “आज देशभर में मजदूरों के ऊपर हमले हो रहे हैं. आप सरकार के आने पर हमें लगा कि इस सरकार के आने से हमारे हालात बदल जाएंगे. लेकिन मजदूरों पर अत्याचार और हमले बढ़ गए हैं. देश में सबसे ज्यादा आबादी मजूदरों की है. यदि ये हमले नहीं रूके तो मजदूर सड़कों पर आ जाएंगे और कोई सरकार उन्हें नहीं रोक पाएगी.”

उन्होंने कहा, “मजदूरों के लिए कानून होने के बावजूद उन्हें 5-6 हज़ार रूपयों में काम करने को मजबूर होना पड़ता है. यदि मजदूर अपने अधिकार के लिए लड़ता है तो उन्हें काम से निकालने की धमकी दी जाती है. कारखानों में लगातार मजदूरों की मौत हो रही है. लेकिन केंद्र और राज्य दोनों सरकारें इस पर ध्यान नहीं दे रही हैं. यह लेबर कानून के विरूद्ध है.”

प्रदर्शन के दबाव में श्रम मंत्री गोपाल राय प्रदर्शनकारियों से मिले और इस विषय में आगे कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है. उन्होंने कहा, “इस घटना को लेकर जिन ट्रेड यूनियनों ने ज्ञापन सौंपा है, उनके प्रतिनिधियों के साथ लेबर सेक्रेटरी, फैक्ट्री इंस्पेक्टर, डिजास्टर  मैनेजमेंट के लोगों के साथ अगले 2-3 दिनों के भीतर मीटिंग बुलाई जाएगी. जिसमें सभी बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे और आगे की कार्रवाई की जाएगी.”

प्रदर्शनकारियों से बातचीत करते श्रम मंत्री गोपाल राय (फ़ोटो- शिवानी भंडारी)

न्यूनतम मजदूरी के सवाल पर श्रम मंत्री ने कहा, “हमारी सरकार बनने के बाद से हम इसके लिए लगातार कोशिश कर रहे हैं लेकिन इसमें कई तरह की दिक्कतें हैं. दिल्ली में न्यूनतम मजदूरी साढ़े नौ हजार से 14 हजार तक है. लेकिन सिस्टम में जितनी चीजें बेहतर होनी चाहिए थी उतनी नहीं हो रही है. उन्हें ज्यादा बेहतर करने की जरूरत है. फैक्ट्रियों को लेकर जो घटनाएं हुई है उसके लिए चर्चा करके तत्काल समाधान निकालने का प्रयास करेंगे.”

एक फैक्ट्ररी में काम करने वाले मजदूर उमेश कुमार चौहान ने न्यूज़सेन्ट्रल24×7  को बताया, “हमारी फैक्ट्री में नल बनाने का काम होता है, लेकिन मजदूरों की सुरक्षा के लिए वहां कोई उपकरण मौजूद नहीं है. अगर आग लग जाए तो उसे बुझाने के लिए कोई यंत्र फैक्ट्री में नहीं रखा गया है. उस फैक्ट्री में 50-52 मजदूर अपनी जान को खतरे में डालकर काम करते हैं.”

उन्होंने मांग करते हुए कहा कि फैक्ट्रियों में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण कदम उठाए जाए.

(फ़ोटो- शिवानी भंडारी)

बता दें कि बीते दिनों झिलमिल औद्योगिक क्षेत्र में आग लगी थी. इस हादसे को लेकर ऐक्टू ने फैक्ट्री इलाके का निरीक्षण किया और अपनी रिपोर्ट में महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं. इस रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली के बवाना, नरेला, सुल्तानपुरी समेत कई जगहों पर आग लगने के कारण और फैक्ट्रियों की स्थिति एक समान है.

बीते शुक्रवार (12 जुलाई) को दिल्ली के फ्रेंड्स कॉलोनी इंडस्ट्रियल एरिया (झिलमिल) की एक फैक्ट्री में लगी भीषण आग ने मजदूरों की जान ले ली. पुलिस और सरकार की माने तो इस हादसे में तीन मजदूरों की मौत हुई है.

लेकिन ऐक्टू की टीम (जिसमें ऐक्टू दिल्ली के कार्यकारी अध्यक्ष वीकेएस गौतम, सचिव श्वेता राज, अभिषेक आदि शामिल थे) को आसपास काम करने वाले मजदूरों ने बताया कि फैक्ट्री में आग लगने समय 40-50 मजदूर भीतर थे. मजदूरों ने बताया कि मरनेवालों की संख्या तीन से ज्यादा है, लेकिन इस आंकड़े को छुपाने की कोशिश की जा रही है.

झिलमिल की फैक्ट्री, जिसमें कुछ दिनों पहले आग लगी थी. (फ़ोटो- श्वेता)

बंद तालों के अन्दर घुटती सांसेः चुप्पी साधे बैठे हैं श्रम विभाग, एमसीडी और सरकार

  • ऐक्टू द्वारा जारी की गई  रिपोर्ट के अनुसार काम के वक्त फैक्ट्री के बाहर ताला लगा हुआ था, जिसके कारण दुर्घटना की स्थिति में मजदूर बाहर नहीं निकल पाए. जिस गली में फैक्ट्री मौजूद थी वहां का रास्ता काफी संकरा था और बिजली के तार काफी नीचे तक लटक रहे थे. ऐसे में दुर्घटना के बाद राहत और बचाव कार्य काफी मुश्किल आईं.
  • फैक्ट्री में अंदर घुसने और निकलने का एक ही रास्ता था, जो फैक्ट्रीज एक्ट के ख़िलाफ़ है.
  • रिपोर्ट के अनुसार पूरे झिलमिल औद्योगिक क्षेत्र में सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम मजदूरी नहीं दी जाती है. यहां मजदूरों को महीने भर 8–9 घंटे काम के बाद मात्र 8000 रूपए दिए जाते हैं, जबकि सरकारी रेट कम से कम 14,000 प्रतिमाह है.
  • फैक्ट्री के अन्दर कोई यूनियन नहीं थी, ज़्यादातर मालिक यूनियन बनाने वाले मजदूरों को काम से निकाल देते हैं.
  • पूरे औद्योगिक क्षेत्र में मजदूरों के लिए छुट्टी का भी कोई प्रावधान नहीं है.
  • जांच में पाया गया कि आग लगने वाली फैक्ट्री के बाहर न्यूनतम मजदूरी अधिनियम व अन्य कानूनों के अनुसार लगाया जाने वाले बोर्ड/सूचना पट्ट, फैक्ट्री का नाम या मालिक के नाम का बोर्ड मौजूद नहीं थे.
  • मजदूरों को पी.एफ., ई.एस.आई व बोनस के अधिकार से वंचित रखा गया था.

ग़ौरतलब है कि इस समस्या को लेकर ऐक्टू व अन्य ट्रेड यूनियनों ने पहले भी प्रदर्शन किया है लेकिन दिल्ली सरकार ने न्यूनतम वेतन लागू करने के लिए कोई भी ठोस कदम नहीं उठाए.

मजदूरों की मौत या हत्या ?

तमाम अग्निकांडों के बावजूद, सुरक्षा मानकों के लिए फैक्ट्रियों का कोई ऑडिट नहीं किया गया. दिन के उजाले में लाइसेंसी और गैर- लाइसेंसी दोनों ही फैक्ट्रियां मजदूरों को गेट बंद कर काम करवा रही हैं. मुनाफे के लिए कानूनों को तोड़ा जा रहा है और मानवाधिकारों का हनन हो रहा है.

ट्रेड यूनियनों ने निम्नलिखित मांगे रखी हैं:-

  • दिल्ली की सभी फैक्ट्रियों का सुरक्षा ऑडिट किया जाए – इसके लिए सभी सम्बद्ध विभागों के अधिकारियों व ट्रेड यूनियनों की एक टीम का तत्काल गठन हो. तय समय सीमा के अन्दर ऑडिट रिपोर्ट पर कार्रवाई की जाए.
  • झिलमिल दुर्घटना में मारे गए लोगों की संख्या की उचित जांच हो. आसपास के मजदूरों द्वारा ज्यादा लोगों के घायल/मृत होने के दावे को ध्यान में रखते हुए जांच की जाए.
  • श्रम व अन्य कानूनों के उल्लंघन को देखने के बावजूद उन्हें नज़र अंदाज़ करने वाले श्रम व अन्य विभागों के अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए.
  • यूनियन बनाने के अधिकार पर हमला व श्रम कानूनों की अवमानना पर तुरंत रोक लगाई जाए.
  • दुर्घटना में मरे मजदूरों को 50 लाख मुआवजा व घायलों को मुफ्त ईलाज व 25 लाख का मुआवजा दिया जाए.
You can also read NewsCentral24x7 in English.Click here
+