पत्रकारिता को स्टुडियो के बाहर दौड़नी चाहिए अब वह पत्रकारिता स्टुडियो के भीतर दौड़ लगा रही है-रवीश कुमार
चैनलों के भविष्य में पत्रकारिता नहीं है. उस रास्ते पर लौटने के लिए अब दस साल और सैंकड़ों रिपोर्टर तैयार करने का धीरज किसी में नहीं है. न ही नीयत है. हर चैनल में अर्णब का ही विस्तार होगा.