ग्राउंड रिपोर्ट: ना सड़क, ना स्कूल और ना ही शौचालय- क्या अपने नाम की क़ीमत चुका रहा है पूर्णिया का पाकिस्तान टोला?
“हम कहेंगे तो आप ताज़्जुब करेंगे..लेकिन गांव में अख़बार नहीं आता, और न ही यहां टीवी है. कोई पढ़ने वाला है ही नहीं तो अख़बार कौन लेगा.”
“हम कहेंगे तो आप ताज़्जुब करेंगे..लेकिन गांव में अख़बार नहीं आता, और न ही यहां टीवी है. कोई पढ़ने वाला है ही नहीं तो अख़बार कौन लेगा.”