छत्तीसगढ़ में सड़कें ‘स्वीमिंगपूल’ में तब्दील, सड़कों के अभाव में गंवानी पड़ रही है लोगों को अपनी जान
कहीं सड़कों के गड्ढों में तैरती नज़र आ रही हैं भैंसे तो कहीं रास्ते की बदहाली से गंवानी पड़ रही लोगों को अपनी जान
छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री रमन सिंह के दावे तो बहुत बड़े-बड़े होते हैं, मगर हकीकत कुछ और ही नज़र आती है। बारिश के दिनों में प्रशासन की कमियां खुल कर सामने आ रही हैं। सड़क न होने की वजह से एक बुज़ुर्ग को अपनी जान गंवानी पड़ी।
नई दुनिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक कोतबा, जशपुर ज़िले के पत्थलगांव तहसील के ग्राम पंचायत फरसाटोली के आश्रित ग्राम गोलियाढ़ बनटोला निवासी 65 वर्षीय रातूराम लंबे अरसे से दिल की बीमारी के साथ ही कई बीमारियों के मरीज थे। शनिवार अचानक तबियत बिगड़ने पर परिजनों ने किराये के वाहन से उन्हें अस्पताल ले जाना चाहा मगर सड़क ना होने के कारण वाहन घर तक नहीं पहुंच सका। ढ़ाई किलोमीटर दूर मुख्य सड़क पर खड़े मार्ग तक बुज़ुर्ग को खाट पे लिटा कर पैदल ले जाया गया, जिसमे करीबन एक घंटे का समय लग गया। अस्पताल पहुंचते-पहुंचते बुज़ुर्ग दम तोड़ चुका था।
वहीं दूसरी ओर अम्बिकापुर की रिंग रोड में चांदनी चौक और पेट्रोल पम्प के बीच की सड़क में गड्ढे की वजह से लबालब भरे पानी में भैंसे गोते खाती हुई नज़र आ रही हैं। गड्ढे इतने गहरे हैं की भैंसों के शरीर का केवल थोड़ा ही हिस्सा नज़र आता है।
रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय लोगों ने कई बार गड्ढों को पाटने के लिए सम्बंधित अधिकारीयों को ध्यान दिलाया मगर राहत के नाम पर केवल क्रशर डस्ट डलवा दी जाती है, जो तेज़ पानी के बहाव में खुद ही बह जाती है। इस खतरनाक सड़क पर स्कूली बच्चों से भरे वाहन भी आते जाते रहते हैं। भारी वाहनों के इस पर चलने से कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।