उत्तर प्रदेशः भारी क़र्ज़ और नोटबंदी से आहत किसान ने पेड़ से लटककर की आत्महत्या
मृतक किसान के बेटे ने बताया कि उनके पिता पर भारी क़र्ज़ होने के चलते तंगी से जूझना पड़ रहा था.
उत्तर प्रदेश के कन्नौज के सियरमऊ गांव में नोटबंदी और क़र्ज़ में डूबे एक किसान ने खेत में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. उनके बेटे ने बताया कि नोटबंदी के बाद उनके पिता ने काफी क़र्ज़ लिया था जिसे वह चुका नहीं पा रहे थे.
ऐसे में तंगी के कारण और क़र्ज़ देने वालों के दबाव के चलते किसान सुभाष चंद्र ने आत्महत्या का रास्ता चुन लिया. मृतक किसान के बेटे अमित शाह का कहना है कि उनके पिता ने खेत पर लगे पेड़ पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. जानकारी मिलने के बाद सभी खेत पर पहुंचे और गांव वालों की मदद से शव को पेड़ से नीचे उतारा गया.
ख़बरों के मुताबिक़ अमित ने बताया कि उनके पिता के 22 लाख रुपये नोटबंदी और अन्य कारणों से बर्बाद हो गया, जिसके बाद उन्हें आर्थिक तंग से जूझना पड़ा. अमित ने बताया कि उनके पिता ने 15 कट्टे आलू लिली कोल्ड स्टोरेज हज़रतपुर और जसोदा कोल्ड में भण्डारन में रखा था. लेकिन आलू की कीमत गिरने की वजह से कोल्ड स्टोरेज के मालिकों ने आलू को फिकवा दिया. इस बात से भी उनके पिता सदमें में थे.
ज्ञात हो कि पिछले महीने कृषि मंत्रालय ने भी इस बात को माना था कि नोटबंदी के फैसले से किसानों को नुकसान हुआ था. इसकी एक रिपोर्ट भी स्थायी संसदीय समिति को सौंपी गई थी.
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हालांकि केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने इस रिपोर्ट का खंडन करते हुए कहा कि यह वास्तविक तथ्यों से बिलकुल विपरीत है. कृषि मंत्री ने ट्वीट किया कि कुछ मीडिया चैनलों एंव समाचार पत्रों द्वारा यह ख़बर चलाई जा रही है कि कृषि विभाग ने यह माना है कि नोटबंदी का किसानों पर बुरा असर पड़ा है और किसान नगदी की किल्लत की वजह से बीज नहीं खरीद पाए थे. यह वास्तविक तथ्यों से बिल्कुल विपरीत है.
कुछ मीडिया चैनलों एवं समाचार पत्रों द्वारा यह खबर चलाई जा रही है कि कृषि विभाग ने यह माना है कि किसानों पर नोटबंदी का बुरा असर पड़ा था और किसान कैश की किल्लत के कारण बीज नहीं खरीद पाए थे। यह वास्तविक तथ्यों के बिल्कुल विपरीत है। वास्तविक तथ्य ये हैं। pic.twitter.com/JfPLpiDh82
— Radha Mohan Singh (@RadhamohanBJP) 21 November 2018