मेरे सपनों का भारत ऐसा नहीं जहां सभी को राष्ट्रवाद का दिखावा करना पड़े: सिंघवी
सिंघवी ने कहा- जब तक हम हर भारतीय में जाति, समुदाय और धर्म से परे लोकतंत्र के सह-स्वामित्व की भावना पैदा नहीं करेंगे, एक राष्ट्र के रूप में भारत का विचार जिंदा नहीं रह सकता।