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राफ़ेल बनाम बोफ़ोर्स : नरेन्द्र मोदी से डरी हुई है आज की मीडिया, बोफ़ोर्स घोटाले में सरकार से पूछे जाते थे सवाल- एन. राम

चर्चित बोफोर्स घोटाले पर उस दौर में जमकर लिखने वाले अंग्रेज़ी अखबार ‘द हिन्दू’ के संपादक एन. राम ने आज के मुख्यधारा की मीडिया द्वारा राफ़ेल घोटाले को लेकर चुप्पी साधने पर निराशा जताई है. कुछ रोज़ पहले राफ़ेल मुद्दे पर मोदी सरकार की आलोचना करते हुए लेख लिखने वाले ‘राम’ ने एक इंटरव्यू में… Continue reading राफ़ेल बनाम बोफ़ोर्स : नरेन्द्र मोदी से डरी हुई है आज की मीडिया, बोफ़ोर्स घोटाले में सरकार से पूछे जाते थे सवाल- एन. राम

चर्चित बोफोर्स घोटाले पर उस दौर में जमकर लिखने वाले अंग्रेज़ी अखबार ‘द हिन्दू’ के संपादक एन. राम ने आज के मुख्यधारा की मीडिया द्वारा राफ़ेल घोटाले को लेकर चुप्पी साधने पर निराशा जताई है.

कुछ रोज़ पहले राफ़ेल मुद्दे पर मोदी सरकार की आलोचना करते हुए लेख लिखने वाले ‘राम’ ने एक इंटरव्यू में आज के मीडिया के काम करने के तरीकों पर अपनी राय रखी. दोनों ही घोटालों के गवाह रहे एन.राम ने बोफोर्स के समय ‘इंडियन एक्सप्रेस’, ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ और ‘द स्टेट्समैन’ जैसे अखबारों की दिलेरी के बारे में बताते हुए आज के समय के मुख्यधारा के मीडिया के काम पर अफसोस जताया.

‘द वायर’ और ‘स्क्रॉल’ जैसे डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म के कामों को सराहते हुए उन्होंने ‘द कैरावैन’ (कारवां) के राफ़ेल मुद्दे पर किये गए कामों को सराहा. राजीव गांधी के समय मीडिया की स्वतंत्रता और आज के दौर में मीडिया की स्वतंत्रता पर भी उन्होंने बात की. उन्होंने कहा कि उस दौर में जैसा ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में हर रोज़ राम जेठमलानी के दस सवाल होते थे तत्कालीन प्रधानमंत्री से वैसा काम आज सोच पाना मुश्किल है.

एन. राम के कहे मुताबिक एक डरे-सहमे मीडिया से आप क्या ही अपेक्षा कर सकते हैं. सोशल मीडिया की कई अच्छाइयों मे से कुछ खामियों को गिनाते हुए उन्होंने खोजी पत्रकारिता के लिए अखबारों और मुख्य धारा के मीडिया का सशक्त होना ज़रूरी बताया.

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