स्त्री-पुरुष समानता के मामले में भारत अपने पड़ोसी देश से काफ़ी पीछे, पूरी दुनिया से लिंगभेद ख़त्म होने में लगेंगे दो सौ साल-रिपोर्ट
ग्लोबल जेंडर की रिपोर्ट में बांग्लादेश 48वें स्थान पर है जबकि भारत 108वें पर.
वर्ल्ड इकनोमिक फोरम (डब्लूईएफ) की 2018 की ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट में स्त्री-पुरुष समानता के मामले में भारत को 108वां स्थान प्राप्त हुआ है. भारत अपने पड़ोसी देश बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल से भी पीछे है. फोरम का मानना है कि विश्व में लिंग भेद को पूरी तरह से ख़त्म करने में अब भी करीब 202 साल लग जाएंगे.
न्यूज़प्लेटफार्म की एक ख़बर के मुताबिक़ इस रिपोर्ट में यह बताया गया है कि 2017 के मुकाबले इस 2018 में वेतन समानता के मामले में कुछ सुधार आया है. लेकिन, राजनीति में प्रतिनिधत्व और शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच के मामले में- हालत काफी ख़राब है.
डब्लूईएफ का मानना है कि जिस तेज़ी से वर्त्तमान समय में सुधार की प्रक्रिया चलायी जा रही है, उस तेज़ी से भी वैश्विक स्तर पर सभी क्षेत्रों से लिंग भेद और असमानता को ख़त्म करने में 202 साल लग जायेंगे.
डब्ल्यूईएफ ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में 149 देशों में स्त्री-पुरुष के बीच चार क्षेत्रों में मौजूद असमानताओं का ज़िक्र किया है. ये क्षेत्र शिक्षा, स्वास्थ्य,आर्थिक अवसर और राजनीतिक सशक्तिकरण के हैं. रिपोर्ट के मुताबिक़ बीते कुछ साल से शिक्षा, स्वास्थ्य और राजनीतिक भागीदारी में सुधार देखा जा रहा था लेकिन इस साल इन तीनों क्षेत्रों में महिलाओं की स्थिति में गिरावट रही.
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि पश्चिमी यूरोपीय देश स्त्री-पुरुष असमानता को 61 साल में पाट लेंगे. जबकि पश्चिमी एशिया और उत्तरी अफ्रीकी देशों को इसमें 153 साल लग जाएंगे.
पिछले दस साल से स्त्री-पुरुष समानता में बेहतर प्रदर्शन कर रहा आइसलैंड इस बार भी टॉप पर है. उसके बाद नोर्वे, स्वीडन और फिनलैंड ने अपनी जगह बनाई है.
इस सूची में भारत 108वें स्थान पर रहा. दक्षिणी एशियाई देशों में सबसे बेहतर प्रदर्शन बांग्लादेश ने किया, जो रैंकिंग में 48वें स्थान पर रहा. इसके अलावा 100वें और 105वें स्थान पर श्रीलंका और नेपाल भी भारत से आगे रहे. इस सर्वे में सीरिया, इराक, पाकिस्तान और यमन ने सबसे निचला स्थान प्राप्त किया है.