वायरल फोटो का दावा: पंडित नेहरू ने RSS के सम्मेलन में भाग लिया था.. सच क्या है?
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क्या भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू किसी आरएसएस शाखा का हिस्सा थे? अगर कोई राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल के प्रशंसक फसबूक पेज I Support Doval, पर किए गए दावे पर विश्वास करे, तो हाँ। इस तस्वीर के साथ यह दावा किया गया है, “बहुत मुश्किल से फोटो मिला है ये, नेहरूजी RSS की शाखा में खड़े हैं! अब बता भी दो कि क्या नेहरूजी भी भगवा आतंकवादी थे?” इन शब्दों के साथ पंडित नेहरु की एक तस्वीर है।
इस तस्वीर में पंडित नेहरु को RSS के नियमों वाली वर्दी के अनुसार छोटे खाकी कपड़े, टोपी और हाथ में एक छड़ी लिए देखा जा सकता है। इस तस्वीर को फेसबुक पेज से 11 मई को शेयर किया गया है और इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक इसे 8000 से ज्यादा बार शेयर किया जा चूका है। इसी तस्वीर को RSS – Rashtriya Swayamsevak Sangh Fans पेज से यह कहते हुए पोस्ट किया गया है, “Indian National Congress जिस आरएसएस से घृणा करते हो उसी के शाखा में आपके Playboy Nehru भी कभी थे पर आशिक़ मिजाज़ मनचले भवरें नेहरू यहां टिक ना सके…यहां के नियम रसिक मिजाज़ चचा को बहुत कठोर प्रतीत हुए।”
तो क्या जवाहर लाल नेहरू आरएसएस का हिस्सा थे?
वास्तव में, इस तस्वीर में पंडित नेहरू ही है लेकिन यह आरएसएस शाखा का नहीं है। दरअसल यह तस्वीर वर्ष 1939 की है और इसे उत्तर प्रदेश के नैनी में लिया गया था। पंडित नेहरू को एक सफेद टोपी पहने हुए देखा जा सकता है। जबकि 1925 में बनाए गए आरएसएस की वर्दी में काले रंग की टोपी थी, न कि सफेद रंग की। यह हिंदी समाचार चैनल न्यूज 18 इंडिया पर दिसंबर 2017 में एक तथ्य-जाँच रिपोर्ट में बताया था। चैनल की इस रिपोर्ट के मुताबिक इस तस्वीर में पंडित नेहरू आरएसएस के किसी शाखा में नहीं बल्कि सेवा दल के कार्यक्रम में भाग ले रहे थे।
सेवा दल क्या है?
सेवा दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का एक जमीनी संगठन है। इसे 1924 में हिंदुस्तान सेवा दल के नाम से स्थापित किया गया था और इसकी स्थापना का उद्देश्य ब्रिटिश शासन का मुकाबला करना था। सेवा दल के सदस्यों को शारीरिक प्रशिक्षण दिया गया था। 1931 में यह कांग्रेस की मुख्य स्वयंसेवी शाखा बन गई। सेवा दल की वर्दी आरएसएस की पहले की वर्दी से मेल खाता है जिसमें काली टोपी, छोटे खाकी कपड़े और एक छड़ी शामिल है। सेवा दल की वर्दी में पंडित नेहरू के इंटरनेट पर कई तस्वीरें हैं।


सोशल मीडिया पर दक्षिणपंथियों द्वारा पंडित नेहरु को अक्सर गलत जानकारियों से निशाना बनाया जाता है। जिसमें भाजपा के आईटी सेल अध्यक्ष अमित मालवीय भी शामिल हैं। भारत के पहले प्रधानमंत्री के व्यक्तित्व को गलत तरीके से पेश करने के लिए सोशल मीडिया पर अक्सर उन्हें लक्षित किया जाता है।