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सुविधाओं को लेकर फिसड्डी साबित हुई वंदे भारत एक्सप्रेस, नई ट्रेन से बदलने की तैयारी में रेलवे

ट्रेन की सीधी सीटे, केबिन में शोर, बोतल रखने का स्थान, वॉशरूम में कपड़े रखने वाला होल्डर से लेकर वॉशबेसिन तक को लेकर यात्री संतुष्ट नहीं है.

अभी चंद महीने ही हुए कि भारत की सेमी हाई-स्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस को रिप्लेस किए जाने की ख़बर सामने आई है. दरअसल, पहले से चल रही है इस ट्रेन को लेकर यात्रियों ने काफ़ी शिकायतें की है. ट्रेन की सीधी सीटे, केबिन में शोर, बोतल रखने का स्थान, वॉशरूम में कपड़े रखने वाला होल्डर से लेकर वॉशबेसिन तक को लेकर यात्री संतुष्ट नहीं थे. तमाम परेशानियों को देखते हुए रेलवे अधिकारियों ने फैसला लिया है कि इस ट्रेन में यात्रियों की सुविधा अनुसार बदलाव किया जाएगा.

हिंदुस्तान टाइम्स के ख़बर के मुताबिक़ अधिकारियों ने बताया कि पहले से चल रही ट्रेन की जगह अब एक नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन लाई जाएगी. इसे यात्रियों को सारी सुविधाओं को ध्यान रखा गया है. इसके साथ ही जब इस महीने के अंत में नई ट्रेन आ जाएगी तो पुराने ट्रेन में बदलाव किया जाएगा.

दरअसल, वर्तमान में तैयार की गई सूची में यह ट्रेन सप्ताह में पांच दिन चलती है. जिसके कारण इसके मरम्मत कार्य के लिए समय नहीं बचता है. इसलिए इसे नई ट्रेन से ही रिप्लेस किया जा रहा है.

अधिकारियों ने आगे बताया कि ”नई ट्रेन क स्टैंडबाय पर रखा जाएगा, ताकि ज़रूरत पड़ने पर इसे बदला जा सके और पुरानी ट्रेन को उचित रख-रखाव के लिए लाया जा सके.”

वहीं, एक दूसरे अधिकारी ने कहा कि ज़्यादातर शिकायतें मामूली थी और उन्हें ठीक कर दिया गया था. जैसे कि यात्रियों की शिकायत थी कि वे सींटों को ज़्यादा नहीं खिंच पाते हैं. इसपर रेलवे ने बताया कि, वंदे भारत एक सेमी हाई स्पीड ट्रेन है, सीटों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वह रीढ़ की हड्डी को नुकसान न पहुंचा सके. इसलिए इन्हें 4 इंच से ज़्यादा आगे नहीं किया जा सकता.

वंदे भारत एक्सप्रेस को ट्रेन-18 के नाम से भी जाना जाता है. इस एक्सप्रेस ट्रेन को 15 फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी ने लॉन्च किया था. नई दिल्ली और वाराणसी के बीच इलेक्ट्रिक टैक्शन पर 160 किलो मीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से चलने वाली इस ट्रेन को भारत की पहली सेमी-हाई स्पीड ट्रेन के रूप में बनाया गया था.

इस ट्रेन को भारत की पहली ग्रीन ट्रेन का टैग हासिल है. इसमें ट्रेन में सफ़ाई के लिए रसायनों के बजाए पानी पर आधारित कार्बनिक सॉल्वैंट्स का उपयोग किया जाता है.

हालांकि लॉन्चिंग के बाद यह ट्रेन हमेशा किसी न किसी दुर्घटना को लेकर सुर्खियों में रही है. लॉन्चिंग के दिन ही वाराणसी से दिल्ली आते वक्त पटरियों पर मवेशियों से टकराने के कारण ट्रेन क्षतिग्रस्त हो गई थी.

22 फरवरी को ट्रेन की ऐरोडायनेमिक नोज़ एक बैल के सामने आ जाने के कारण टूट गयी थी. जिसे बाद में बदलना पड़ा था. इसके एक दिन बाद ही ड्राइवर की विंडस्क्रीन और कुछ कोचों की खिड़कियां पत्थर की चपेट में आने के कारण क्षतिग्रस्त हो गई थी.

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