यूपी पुलिस की गोली ने बनाया विकलांग, अब मुआवज़ा ना देकर कमर तोड़ रही सरकार
यूपी सरकार ने विवेक तिवारी के परिवार के लिए 25 लाख रुपये मुआवज़े की घोषणा की, लेकिन 26 वर्षीय जितेंद्र यादव के हिस्से में फूटी कौड़ी भी नहीं।
उत्तर प्रदेश में ताज़ा एनकाउंटर के मसले ने लोगों के पुराने जख़्म हरे कर दिए हैं। कई मीडिया रिपोर्ट में ऐसे कई व्यक्तियों की कहानी निकल कर सामने आयी है जिन्हें कभी यूपी पुलिस की क्रूरता का शिकार होना पड़ा है। यह क्रूरता कुछ बेगुनाह लोगों के लिए बहुत ही भयानक साबित हुई, और वो आज भी उस घटना के प्रभाव से जूझ रहे हैं।
इन्हीं कहानियों के बीच एक दर्दभरी कहानी जितेंद्र यादव की भी है। 26 वर्षीय जितेंद्र को आठ महीने पहले नोएडा में यूपी पुलिस अधिकारी ने गोली मार दी थी। गोली से उसके रीढ़ की हड्डी घायल हो गई थी। जिसके बाद उसके कमर से नीचे के हिस्से में लकवा मार गया था। शारीरिक असमर्थता का आलम ये है कि वे ठीक से चल भी नहीं सकते।
इकोनॉमिक टाइम्स से बात करते हुए यादव ने कहा, “हाल का यह मामला यूपी पुलिस के कामकाज करने के तरीक़े को दर्शाता है। बंदुक़ चला कर अपनी लापरवाही से किसी का भी जीवन नष्ट कर देते हैं, जैसा मेरे साथ इन्होंने किया था।”
लखनऊ में विवेक तिवारी की हत्या के बाद यादव ने योगी आदित्यनाथ सरकार में नाउम्मीदी ज़ाहिर की है। यादव के अनुसार, उसके अपने साथ हुए घटना के समय भी मुख्यमंत्री योगी ने आश्वासन के सिवा कोई मदद नहीं की। यादव ने बताया कि ” जब यूपी पुलिस के अधिकारी ने मुझे गोली मारी थी तब मंत्री जी ने कहा था कि जब तक मैं अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो जाता हूं तब तक सरकार मेरे साथ खड़ी रहेगी। जब मैं अस्पताल में था तब सरकार ने अस्पताल का सारा बिल चुकाया लेकिन उसके बाद मुझे अकेला छोड़ दिया। मुझे कोई और मुआवज़ा नहीं दिया गया था। अब मैं अपनी ख़ुद की जेब से अपने चिकित्सा उपचार पर 50,000 रुपये प्रति माह ख़र्च कर रहा हूं। जो मंत्री और विधायक मुझे देखने आए थे, अब उनके पास मेरे लिए समय नहीं है।”