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उत्तर प्रदेशः योगी सरकार की तानाशाही, सोनभद्र नरसंहार पीड़ितों से मिलने गई प्रियंका गांधी को पुलिस ने हिरासत में लिया

सोनभद्र ज़िले में भूमि विवाद को लेकर हुई हिंसा में 10 लोगों की हत्या हो गई थी, जबकि 24 से अधिक लोग घायल हो गए थे.

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र नरसंहार के पीड़ित परिजनों से मिलने जा रही कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को शुक्रवार को मिर्जापुर के नारायणपुर में रोक लिया गया. इसके विरोध में प्रियंका गांधी वहीं  धरने पर बैठ गई. जिसके बाद मिर्जापुर प्रशासन ने उन्हें हिरासत में ले लिया.

समाचार एजेंसी एएनआई ने एक विडियो जारी किया है. जिसमें हिरासत में लिए जाने के बाद प्रियंका गांधी यह कहते हुए नज़र आ रही हैं कि, ‘हां, हम अभी भी नहीं झुकेंगे. हम लोग कहीं भी जाने के लिए तैयार हैं. हम शांतिपूर्वक पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे थे. मुझे नहीं पता कि ये लोग कहां लेकर जा रहे हैं.’

एनडीटीवी से बात करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि, ‘मैं सिर्फ पीड़ित परिवार से मिलना चाहती हूं. जिनके परिवार के सदस्यों को निर्दयता से गोली मार दी गई है. मेरे बेटे के उम्र के एक लड़के को गोली मार दी गई है और वह अस्पताल में पड़ा हुआ है. मुझे बताएं कि किस कानूनी आधार पर मुझे रोका गया है.’

प्रियंका ने आगे कहा कि, ‘जब पुलिस ने मुझे बताया कि वो मुझे जाने की अनुमति नहीं देंगे. तब मैने उनसे ऑर्डर मांगा लेकिन वे मुझे कुछ भी नहीं दिखा सके. इसलिए मैने कहा कि यदि आप मुझे वहां नहीं जाने के ऑर्डर नहीं दिखा सकते हैं तो मैं वहां (सोनभद्र पीड़ितों से मिलने) जाउंगी. तब उन्होंने मुझे गिरफ्तार कर लिया.’

बता दें कि मिर्जापुर में प्रियंका के साथ उनके समर्थन भी धरने पर बैठ गए थे. उनके समर्थकों ने यूपी सरकार के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाजी की. इस मामले पर कांग्रेस के ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट से ट्वीट किया गया है. जिसमें यूपी के योगी सरकार को तानाशाह बताया गया है.

कांग्रेस ने कहा है कि, ‘यूपी की अजय सिंह बिष्ट सरकार द्वारा कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को सोनभद्र जाने से रोकना लोकशाही का अपमान है. बगैर लिखित आदेश और संविधान के मूल भावना के विपरित अजय सिंह बिष्ट सरकार का यह कदम तानाशाही को दर्शाता है.’

राहुल गांधी ने ट्विटर पर प्रियंका के रोके जाने का वीडियो शेयर करते हुए लिखा है कि, ‘यूपी के सोनभद्र में प्रियंका को गैर-कानूनी तरीके से गिरफ़्तार करना विचलित करनेवाला है. उन्हें मारे गए 10 आदिवासियों के परिवार जिन्होंने अपना ज़मीन खाली करने से इनकार कर दिया था. उनसे मिलने से रोकना सत्ता का दुरुपयोग है. यह साबित करता है कि बीजेपी सरकार में यूपी में किस तरह से असुरक्षा का माहौल बनते जा रहा है.’

ग़ौरतलब है कि, बीते बुधवार को सोनभ्रद ज़िले में भूमि विवाद को लेकर हुई हिंसा में 10 लोगों की हत्या हो गई थी, जबकि 24 से अधिक लोग घायल हो गए थे. पुलिस ने इस सामूहिक हत्या कांड में 29 लोगों को गिरफ़्तार किया है और बाकि आरोपियों को पकड़ने के लिए छापेमारी कर रही है. बता दें कि इस मामले में 61 लोगों पर मामला दर्ज किया गया है. जिसमें 50 लोग अज्ञात हैं.

 

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