योगी राज में बलात्कार पीड़िता को नहीं मिला इंसाफ़, हार मानकर दे दी जान
बीते साल 15 सितंबर 2018 को महिला ने लखनऊ विधानसभा के सामने धरना प्रदर्शन भी किया और मुख्यमंत्री आवास जाकर आत्महत्या करने की कोशिश की थी.
उत्तर प्रदेश के गोण्डा ज़िले में 35 वर्षीय महिला की आत्महत्या करने का मामला सामने आया है. महिला के साथ बलात्कार की घटना को अंजाम दिया गया था. पीड़ित महिला कई दिनों तक इंसाफ पाने के लिए भटकती रही और आखिरकार हार मानकर अपनी जान दे दी.
दरअसल, महिला का आरोप था कि उसके गांव के दो सगे भाइयों ने तांत्रिक विद्या का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया और विडियो बनाया. बाद में वे विडियो वायरल करने की धमकी देते हुए उसके साथ दुष्कर्म को अंजाम देते रहें.
जनसत्ता की ख़बर के अनुसार महिला ने 7 अगस्त 2018 को स्थानीय थाने में श्याम कुमार और शंकर दयाल दोनों आरोपियों के ख़िलाफ़ सामूहिक बलात्कार और जान से मारने की धमकी के आरोप में प्राथमिकी दर्ज करवाई थी. लेकिन सबूतों की कमी होने की वजह से मामले को रफा-तफा कर दिया गया. पीड़ित महिला लगातार न्याय पाने के लिए आला-अधिकारियों से गुहार लगाती रही लेकिन किसी ने कोई सुनवाई नहीं की.
बीते साल 15 सितंबर 2018 को महिला ने लखनऊ विधानसभा के सामने धरना प्रदर्शन भी किया और मुख्यमंत्री आवास जाकर आत्महत्या करने की कोशिश की थी. लेकिन मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसे रोक लिया और न्याय दिलाने का आश्वासन देकर वापस गोण्डा भेज दिया.
ग़ौरतलब है कि मुख्यमंत्री के आवास में जाकर आत्महत्या का प्रयास करने वाली महिला को इंसाफ नही मिला. इससे आहत होकर बीते सोमवार की शाम महिला ने अपने घर की छत में फंदे से लटक कर आत्महत्या कर ली. महिला की मृत्यु के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया. जिसकी वजह से कई थानों की पुलिस को मौके पर बुलाना पड़ा.
इस पूरे मामले में पुलिस अधीक्षक आ.पी सिंह ने कहा कि तत्काल प्रभाव से अजीत प्रताप सिंह और परमानंद तिवारी को निलंबित कर दिया गया है. वहीं प्रभारी निरीक्षक वेदप्रकाश श्रीवास्तव को जांच में लापहरवाही बरतने के लिए लाइन हाजिर किया गया है.