फ़सलों के नहीं मिल रहे वाजिब दाम, किसान बोले- अबकी बार नहीं गलेगी मोदी की दाल
किसानों का कहना है कि मोदी जी ने वादा किया था कि अच्छे दिन आएंगे, लेकिन हमें सबसे बुरे वक्त से गुजरना पड़ रहा है.
भाजपा सरकार की अगुवाई वाले महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में प्याज और आलू की कीमतों में भारी गिरावट के कारण किसानों के हालात दिन-प्रतिदिन बिगड़ते जा रहे हैं. सरकार से नाराज़ किसानों का कहना है कि आगामी चुनावों में मोदी सरकार को इसका नतीज़ा भुगतना पड़ेगा.
न्यूज़18 की ख़बर के अनुसार फसलों की गिरती कीमत से परेशान किसानों ने आगामी चुनावों में नरेंद्र मोदी की सरकार को वोट देने से इंकार कर दिया है. महाराष्ट्र के किसानों को प्याज की फसल को 1 रुपये किलोग्राम के हिसाब से बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. मध्य-पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों की कमज़ोर मांग की वजह से प्याज की कीमतों (खेती के स्तर पर) में 83 प्रतिशत की गिरावट आई है. लेकिन, इसके बावजूद केंद्र और राज्य सरकार किसानों की समस्याओं को अनदेखा कर रही है.
महाराष्ट्र के किसान माधव पावसे का कहना है कि वह 2019 के विधानसभा चुनावों में भाजपा को वोट नहीं देंगे. मोदी जी ने अच्छे दिन का वादा किया था. इस उम्मीद से हमने भाजपा को वोट दिया था. लेकिन अब हम सबसे बुरे वक्त से गुजर रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि मैंने अपनी दो एकड़ ज़मीन में 15 टन प्याज को उगाने के लिए 80,000 हज़ार से ज्यादा रुपये खर्च किए लेकिन मैं मौजूदा बाजार मूल्य की वजह से 3,000 रुपये से ज्यादा प्राप्त नहीं कर पाया.
महाराष्ट्र के कुछ किसान अपना परिवहन लागत बचाने के लिए खेतों में प्याज को सड़ने के लिए छोड़ने पर मजबूर हैं.
उत्तर प्रदेश के मुहाजिदपुर में आलू की कीमतों में लगभग 86 प्रतिशत की गिरावट आई है. 55 वर्षीय किसान गोपी चंद का कहना है कि मैंने एक हेक्टेयर में आलू उगाने के लिए अपना 1,00,000 रुपये गवा दिए हैं. एक अन्य किसान बबलू सिंह ने कहा कि 50 किलोग्राम फसल पोषक तत्व डायमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की कीमत 400 रुपए से बढ़कर 1,450 रुपये हो गई है.