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योगी राज में प्रत्यक्ष कर बोर्ड अध्यक्ष सुशील चंद्रा के रिश्तेदार की जांच रोकी गई, काले धन के जरिए जमीन खरीद-फरोख्त के लगे थे आरोप

ख्यमंत्री योगी ने यथास्थिति बनाए रखने का हवाला देते हुए जांच को रोकने का आदेश दिया था.

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के अध्यक्ष सुशील चंद्रा के बहनोई, बिजनेसमैन अरविंद गोयल पर कथित रूप से काले धन के जरिए मुरादाबाद में लगभग 200 एकड़ जमीन को खरीदने और बेचने का आरोप लगा है. अरविंद गोयल ने 2004 से 2017 के बीच कई बार जमीन की खरीद-फरोख्त को अंजाम दिया है.

इकॉनमिक टाइम्स की ख़बर के अनुसार अरविंद गोयल और उनके भाई, विपिन गोयल ने कथित तौर पर 20 कंपनियों के जरिए जमीन के बड़े भूखंड खरीदे हैं. राज्य सरकार के स्टाम्प और पंजीकरण विभाग की जांच में पाया गया कि जिन कंपनियों से जमीन की खरीद को अंजाम दिया गया था वह दरअसल शेल कंपनियां हैं. इनमें से कुछ कंपनियों का रजिस्ट्रेशन एक ही पते पर कराया गया है.

दिसंबर 2017 को मुख्यमंत्री योगी आदित्नाथ ने इस मामले की जांच करने के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) को आदेश दिया था. विभागीय रिपोर्टों में उत्तर प्रदेश से बाहर रजिस्टर्ड शेल कंपनियों और काले धन की कथित भूमिका को देखते हुए जांच सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय (ED) या सीरियस फ्रॉड इनवेस्टिगेशन ऑफिस को सौंपने की सिफारिश की गई थी, हालांकि जांच का आदेश देने के एक हफ्ते के भीतर मुख्यमंत्री के ‘यथास्थिति’ बनाए रखने के आदेश पर जांच को अचानक रोक दिया गया था.

ग़ौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जांच रोकने का आदेश तब दिया जब अरविंद गोयल ने रिप्रजेंटेशन देते हुए यह कहा कि उनके ख़िलाफ़ यह जांच “मानसिक प्रताड़ना” साबित होगी. हालांकि रियल एस्टेट निवेशक गोयल ने दावा किया था कि उनके ख़िलाफ़ एक जांच में स्टांप ड्यूटी से जुड़ी कोई गड़बड़ी नहीं मिली थी.

गोयल के मीडिया संबंधों को संभालने वाले कलमवीर सिंह ने अरविंद गोयल के ख़िलाफ़ मनी लॉन्ड्रिंग और पंजीकरण अधिनियम का उल्लंघन करने वाले सभी आरोपों को खारिज किया. इस पूरे मामले पर प्रत्यक्ष कर बोर्ड के चेयरमैन सुशील चंद्रा ने कहा कि कहा कि इससे उनका कोई संबंध नहीं है. अरविंद गोयल उनके रिश्तेदार भले हों, लेकिन फिलहाल उनसे सुशील काकोई संबंध नहीं है.

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