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अंधेरे में उत्तर प्रदेश की पढ़ाई: 55 हज़ार स्कूलों में नहीं है बिजली की व्यवस्था

भाजपा सरकार सौभाग्य योजना के तहत घर-घर बिजली पहुंचाने का दावा पेश करती आई है.

लोकसभा चुनाव की तैयारियों में लगी भारतीय जनता पार्टी केंद्र और राज्यों में अपने सरकारों द्वारा किए गए कामों का प्रचार कर रही है. इस बीच उत्तर प्रदेश से ऐसी सच्चाई सामने आई है, जो प्रदेश की योगी सरकार और केंद्र की मोदी सरकार पर सवाल खड़े करती है. राज्य के 55 हज़ार स्कूलों में बिजली की व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण छात्रों को अंधेरे क्लास रूम में पढ़ने को मजबूर होना पड़ता है.

दैनिक जागरण की ख़बर के अनुसार चुनाव की तारीखों का ऐलान करने के बाद निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश में पोलिंग बूथ बनाने के लिए प्राइमरी और जूनियर स्कूलों की सूची मांगी थी. उसी दौरान बिजली विभाग द्वारा पेश किए गए आंकड़ों में पता चला कि यूपी के लगभग 55 हजार स्कूलों में अभी भी बिजली कनेक्शन नहीं है.

दैनिक जागरण  के मुताबिक उत्तर प्रदेश के विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा है कि शिक्षा विभाग छात्रों को मूलभूत सुविधाएं देने की बड़ी-बड़ी बातें करता है, लेकिन स्थिति यह है कि लाखों बच्चों बिना बिजली और पंखों के पढ़ाई कर रहे हैं.

ग़ौरतलब है कि इतनी बड़ी संख्या में स्कूलों में बिजली कनेक्शन न होने को लेकर प्रमुख ऊर्जा सचिव आलोक कुमार ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि जिन स्कूलों में बिजली कनेक्शन नहीं है उनकी सूची तैयार की जाए. उन्होंने कहा कि उस सूची को विद्युत वितरण निगमों के नोडल अधीक्षण अभियंताओं को दिया जाए और बेसिक शिक्षा विभाग धनराशि उपलब्ध कराए, जिसके बाद सभी स्कूलों में अभियान चलाकर बिजली कनेक्शन दिया जाएगा.

प्रमुख सचिव ने कहा कि स्कूलों का बिजली कनेक्शन बकाया बिल की वजह से काटा गया है. ग्राम पंचायतें वहां जिम्मेदारी निभाए. दरअसल, चतुर्थ राज्य वित्त आयोग के निर्देशानुसार ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित 50 प्रतिशत धनराशि का प्रयोग पूर्व सृजित संपत्तियों के रखरखाव के लिए किया जा सकता है.

प्रमुख सचिव ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में संचालित प्राथमिक स्कूलों में बिजली बिल का भुगतान आयोग के निर्देशानुसार किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि बकाया बिलों के भुगतान के बाद दोबारा बिजली कनेक्शन किया जाएगा.

ग़ौरतलब है कि राज्य के यह हालात लोकसभा चुनावों से ठीक पहले सामने आए हैं. एक तरफ भाजपा सरकार सौभाग्य योजना के तहत घर-घर बिजली पहुंचाने का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ लाखों बच्चे बिना बिजली और पंखों के पढ़ाई करने के लिए मजबूर हैं.

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