उज्ज्वला योजना की खुली पोल, 85 फीसदी गरीब परिवार दोबारा चूल्हा फूंकने पर मजबूर
ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग की सही सुविधा न होने की वजह से लोगों को सब्सिडी का लाभ नहीं मिल रहा है.
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू की गई उज्ज्वला योजना अब फेल होती नजर आ रही है. इस योजना के तहत गैस कनेक्शन लेने वाले परिवारों में से 85 फीसदी परिवारों ने फिर से चूल्हे का उपयोग करना शुरू कर दिया है.
जनसत्ता की ख़बर के मुताबिक उज्ज्वला योजना का लाभ लेने वाले परिवारों में से 10-15 फीसदी परिवारों ने ही दोबारा गैस सिलेंडर भरवाया है, जबकि 85-90 फीसदी परिवारों ने लकड़ियों और कंडो की आसान पहुंच की वजह से दोबारा चूल्हे का रुख कर लिया है.
ग़ौरतलब है कि उज्ज्वला योजना के तहत एक सिलेंडर को तकरीबन 1000 रुपए में भरवाना पड़ता है. हर महीने सिलेंडर पर इतनी राशि खर्च करना गरीब परिवरों के बस में नहीं है. लोगों को चूल्हे का इस्तेमाल करना सस्ता साधन लगता है. वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण इलाकों में गैस सिलेंडरों की संख्या में भी कमी दर्ज की गई है.
केंद्र सरकार द्वारा बैंक खाते में सब्सिडी जमा करने का फ़ैसला भी इस योजना के नाकाम होने का एक बड़ा कारण है, क्योंकि ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग की सही सुविधा न होने की वजह से लोगों को सब्सिडी का लाभ नहीं मिल रहा है.
ज्ञात हो कि मोदी सरकार ने गरीब परिवारों की महिलाओं को चूल्हे से छुटाकारा दिलाने के लिए इस योजना को शुरूआत की थी, जिसके तहत सरकार ने 8 करोड़ गरीब परिवारों को गैस कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा है.