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छत्तीसगढ़ः बैगा आदिवासियों को नहीं मिल रहा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ, काट रहे हैं तहसील के चक्कर

परेशान बैगा आदिवासियों ने कलेक्टर कार्यालय का घेराव करनी की योजना बनाई है.

छत्तीसगढ़ के लोरमी में बैगा आदिवासियों प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं. अपने अधिकारों के लिए बैगा आदिवासियों को तहसील कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ रहा है. परेशान बैगा आदिवासियों ने कलेक्टर कार्यालय का घेराव करनी की योजना बनाई है.

पत्रिका की ख़बर के अनुसार तहसील में आदिवासियों को यह बताया जा रहा है कि जो साफ्टवेयर सरकार द्वारा भेजा गया है, उसमें वनग्राम का उल्लेख नहीं है. जिसकी वजह से योजना के हक़दार किसानों को लाभ से वंचित होना पड़ रहा है. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 5 एकड़ तक की ज़मीन वाले किसानों को सालाना 6 हज़ार रुपये मिलने का प्रावधान है.

इसके लिए किसान ऑनलाइन फॉर्म भरवाकर योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए पटवारियों के दफ्तर जा रहे हैं. लेकिन जब इसी योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए बैगा आदिवासी तहसील पहुंचते हैं तो तहसील और पटवारी कार्यालय से उन्हें भगा दिया जाता है.

तहसील व पटवारी कार्यालय द्वारा कहा जाता है कि यह योजना सिर्फ राजस्व ग्राम के लिए है. वन ग्राम का उल्लेख संबंधित सॉफ्टवेयर में दर्ज नहीं हो रहा है. ग़ौरतलब है कि लोरमी क्षेत्र 90 प्रतिशत जंगलों से घिरा हुआ है. लोरमी जनपद के 35 गांव ऐसे वनों में निवास करते हैं.

वन विभाग से लेकर पंचायत विभाग द्वारा प्रति वर्ष करोड़ो रुपये का कार्य कराया जाता है. जो सिर्फ कागजों तक सीमित रहता है. बैगा आदिवासियों को सिंचाई की सुविधा भी नहीं मिल पाती है क्योंकि सिंचाई के लिए बनाए गए बांध एंव तालाब में पानी नहीं रूकता है. वहीं दूसरी तरफ़ तीन सालों से सूखे की मार ने यहां के लोगों की कमर तोड़ दी है.

सरकार ने बैगा आदिवासियों को ज़मीन का अधिकार तो दिया है लेकिन वनग्राम अब राजस्व ग्राम में बदल गए हैं. लेकिन फिर भी बैगा आदिवासियों को योजना का लाभ नहीं मिल रहा है. जबकि इस योजना के अनुसार सबसे ज्यादा प्राथमिकता इन्हें ही मिलनी चाहिए थी.

ग्राम पंचायत बिजरकछार, मौहामाचा, सलगी, बांटीपथरा समेत 18 वनग्राम को राजस्व ग्राम में बदला गया है. लेकिन बावजूद इसके बैगा आदिवासी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभ से वंचित हैं.

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