कांचा इलैया आर्थिक-सामाजिक न्याय की ऐसी आवाज़ हैं जिसे दबाना नामुमकिन है!
इसमें कोई शक नहीं है कि हमारी यूनिवर्सिटियों में मौजूद सत्तापक्ष के लोग सत्ता की मदद से असरदार और अच्छे दलित विद्वानों को बाहर करने पर तुले हैं। उनकी लेखनी द्वारा उठाए गए प्रश्न सत्तापक्ष को असहज महसूस करवा रहे हैं।