जब संविधान की धज्जियाँ उड़ती हैं, तब रात को जूते बाँधे जाते हैं- रवीश कुमार
दिन में प्रधानमंत्री के भाषणों का वक़्त होता है इसलिए ‘इंसाफ़’ का वक़्त रात का चुना गया। आधी रात के बाद जब जब सरकारें जागीं हैं तब तब ऐसा ही ‘ इंसाफ़’ हुआ है। जूतों की टाप सुनाई देती है।