अब डीयू की लड़कियों को कैद करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है!
बेश़क इनकी मांगों के आगे पितृसत्तात्मक समाज दहाड़ मार रहा हो। लेकिन, उस समय इनके इस गाने ने उस दहाड़ को खामोशी में तब्दील कर दिया था और सुबह तक ये लड़कियां और इनके आज़ादख़याली विचार डीयू के बाहर हवाओं में तैरते रहे।