पाठकों के दिमाग में गोबर भर रहे हिन्दी के अख़बार, सरकारी प्रोपेगैंडा के शिकार हो रहे अख़बारों के रिपोर्ट: रवीश कुमार
हिन्दी पट्टी के नौजवानों की बुद्धि में गोबर भरे जा रहे हैं ताकि वे महानगरों के सुविधाओं से लैस तेज तर्रार छात्रों का मुकाबला न कर सकें.