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बस खता इतनी-सी थी कि यहीं पैदा हुए और मुसलमान थे’, गौरक्षकों की भीड़ का शिकार हुए पहलू ख़ान की दास्तान.. आमिर अज़ीज़ की ज़ुबानी

‘एक तो लोग थे लोगों से दुखी, खुद से भी परेशान थे. पहलू मरते-मरते 6 लोगों का नाम ले गए. मेरा इंसाफ करना आखिरी पैगाम दे गए.’

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