दिल्ली के प्रदूषण के लिए किसानों को दोष देना बेवकूफी है!
दशहरे से लेकर दीवाली तक खूब आतिशबाज़ी की जाएगी। इंडिया कोई मैच जीत जाए तो आतिशबाज़ी, किसी की शादी हो तो आतिशबाज़ी, कोई पार्टी चुनाव जीत जाए तो आतिशबाज़ी। ये शहरी लोग किसी भी मौके पर आतिशबाज़ी करने से नहीं चूकते। ऐसे में किसी की अय्याशी से होने वाले प्रदूषण को तो सब नकार देते हैं, लेकिन, किसानों को घेरने लगते हैं।