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“या तो ज़मीन से भगवान उखड़ेगा या आसमान में धान जमेगा”: मजदूर दिवस पर पढ़िए श्रमिकों के संघर्ष को बयां करती कुछ कविताएं

मैं किसान हूं, आसमान में धान बो रहा हूं. कुछ लोग कह रहे हैं कि पगले! आसमान में धान नहीं जमा करता, मैं कहता हूं पगले घघले! अगर ज़मीन पर भगवान जम सकता है, तो आसमान में धान भी जम सकता है

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