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संस्थाओं की बर्बादी के बीच जनता की मदहोशी, यही तो हैं अच्छे दिन- रवीश कुमार

क्या यह अच्छा नहीं हो रहा है कि सरकार की सुविधा के लिए सारी संस्थाएं तहस-नहस की जा रही हैं? आपकी चुनी हुई सरकार जैसा मौज चाहती है, मौज कर रही है. यही तो अच्छे दिन हैं.

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