किसानों की आत्महत्या बढ़ी, बेरोज़गारी दर सबसे ज़्यादा- देशवासियों के हित में नहीं किया कोई काम: शरद यादव
शरद यादव ने ट्वीट कर कहा, “एनडीए सरकार देश विरोधी है और इस सरकार के कार्यकाल में कोई भी काम जनता के हित में नहीं हुआ है.”
राजद के टिकट पर मधेपुरा से चुनाव लड़ने वाले वरिष्ठ नेता शरद यादव ने किसान आत्महत्या, बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार आदि मुद्दों को लेकर एनडीए सरकार पर निशाना साधा है. शरद यादव ने ट्वीट कर कहा है एनडीए सरकार देश विरोधी है और इस सरकार के कार्यकाल में कोई भी काम जनता के हित में नहीं हुआ है.
अपने ट्वीट के जरिए शरद यादव ने कहा कि, “एनडीए सरकार के कार्यकाल में किसानों की आत्महत्या बढ़ी, बेरोज़गारी दर पिछले 45 वर्ष में सबसे ज्यादा 8%, सरकारी संस्थाओं की छवि गिरी, कई कंपनियां बंद की कगार पर, सभी काम चंद लोगो के हाथ में, लोग बैंकों का पैसा लेकर भागे, भ्रष्टाचार आदि कोई काम भी देशवासियों के भले में नहीं हुआ है.”
एनडीए सरकार के कार्यकाल में किसानों की आत्महत्या बड़ी, बेरोजगारी दर पिछले 45 वर्ष में सबसे ज्यादा 8%, सरकारी संस्थाओं की छवि गिरी,कई कंपनियां बंद की कगार पर,सभी काम चंद लोगो के हाथ में, लोग बैंकों का पैसा लेकर भागे,भ्रष्टाचार आदि कोई काम भी देशवासियों के भले में नहीं हुआ है।
— Sharad Yadav Memorial (@SharadYadavMP) April 28, 2019
ग़ौरतलब है कि एनडीए सरकार के कार्यकाल में बेरोज़गारी दर पिछले 5 सालों में सबसे ज़्यादा बढ़ी है. राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय की सर्वे के मुताबिक़ 2017-18 में बेरोजगारी का आंकड़ा 6.1 प्रतिशत पर रहा है.
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक नरेंद्र मोदी के शासन काल में 2014-15 के दौरान किसानों के आत्महत्या करने की दर 42 प्रतिशत बढ़ गई है. ब्यूरो के मुताबिक, 2014 में 5,650 किसानों ने आत्महत्या की थी, 2015 में 8,007 किसानों ने आत्महत्या की. इनमें महाराष्ट्र में सबसे ज़्यादा 3,030 किसानों ने आत्महत्या की.
मोदी सरकार के कार्यकाल में बीएसएनएल कंपनी 2014 में 8 हज़ार करोड़ की फायदे में थी. लेकिन 2016 में 913 करोड़ की घाटे में आ गयी. स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया 2092 करोड़ के फायदे में थी 4 हज़ार करोड़ के घाटे में है, कोल इंडिया, आआईएम, ओएनजीसी जैसी बड़ी कंपनियां भी घाटे में है.
वहीं, यदि सरकारी संस्थाओं की छवि की बात करें तो एनडीए सरकार के कार्यकाल में ही पहली में सुप्रिम कोर्ट के चार जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि ‘लोकतंत्र ख़तरे में है.’