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उत्तरप्रदेशः किसानों ने आवारा पशुओं को स्कूल में दिलाया दाखिला, कुछ को स्वास्थ्य केंद्र में किया भर्ती, पढ़ें क्या है पूरा मामला

यह एक या दो जगह की नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में यही स्थिति है.

उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों में आवारा पशुओं से परेशान किसानों ने इन्हें स्कूलों और प्राथमिक स्वस्थ्य केंद्र जैसे स्थानों पर बंद कर दिया है. दरअसल, ये आवारा पशु किसानों के खेतों की फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं.

बता दें कि यह समस्या एक या दो जगह की नहीं है, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में कई ज़िले के किसान आवारा पशुओं से परेशान हैं. डेलीहंट की एक  ख़बर के अनुसार बीते गुरुवार को मथुरा, अलीगढ़, जौनपुर, फिरोज़ाबाद और गोंडा समेत कई जगहों पर ग्रामीणों ने आवारा पशुओं को स्कूलों में बंद कर दिया. जिसकी वजह से स्कूल की बच्चों की छुट्टी कर दी गई. किसानों ने आवारा पशुओं को स्कूल में बंद करके बाहर से ताला लगा दिया. किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन को कई बार आवारा जानवरों के बारे में जानकारी दी है और उनसे आवारा पशुओं को पकड़ने का आग्रह भी किया है. लेकिन प्रशासन इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है.

किसानों का कहना है कि आवारा पशु खेतों में जाकर उनकी फसलों को बर्बाद कर देते हैं. यही नहीं आवारा पशुओं ने कई बार ग्रामीणों पर हमला भी किया है. जिसकी वजह कई लोग घायल हो गए.

गोंडा में भी आवारा सांड़ों से परेशान ग्रामीणों ने 50 से ज्यादा सांड़ों को एक प्राथमिक विद्यालय में बंद कर दिया. सुबह जब स्कूल के अध्यापक पहुंचे तो नजारा देखकर दंग रह गए. ऐसा ही कुछ अलीगढ़ तहसील इगलास क्षेत्र में हुआ. यहां के किसानों ने 700-800 आवारा पशुओं को गांव के विद्यालय और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अस्पताल के अंदर बंद कर दिया और ज़िला प्रशासन के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाजी की. किसानों का कहना है कि हम सरकार से आवारा पशुओं के लिए गौशालाओं की मांग कर रहे हैं. लेकिन इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है.

ग़ौरतलब है कि योगी सरकार गौरक्षा की बातें करती है. लेकिन दूसरी तरफ उनके की राज्य में आवारा पशुओं ने किसानों के जीवन को संकट में डाल दिया है. ऐसे में सरकार न तो किसानों की समस्यओं को गौर कर रही है और न ही आवारा पशुओं को लेकर कार्रवाई कर रही है.

न्यूज़सेन्ट्रल24X7 से बातचीत करते हुए कानपुर गाय सेवा सोसाइटी के पुरुषोत्म का कहना है कि आवारा पशुओं की यह समस्या एक-दो स्थानों की नहीं बल्कि पूरे राज्य की समस्या है. प्रदेश में गौ सेवा आयोग बनाया गया था लेकिन उसके अध्यक्ष छोड़कर चले गए अब आयोग को चलाने के लिए कोई दूसरा अध्यक्ष नहीं है. जो आवार पशुओं की समस्या पर ध्यान दे.

उन्होंने आगे कहा कि सरकार की ओर से कहा गया है कि जो लोग आवारा पशुओं का पालन करेगा उसे सरकार की तरफ से खर्च दिया जाएगा. लेकिन इसको लेकर कोई दिशा-निर्देश या व्यवस्था नहीं है. बुंदेलखंड में भी नाराज़ किसानों ने  आवारा गायों को स्कूलों में बंद कर दिया गया है. पुरुषोत्म ने कहा कि यदि प्रशासन व्यवस्था करे तो आवारा पशुओं की समस्या का समाधान हो सकता है.

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