“65 सालों की मेहनत से तैयार किए गए जनकल्याण के बुनियादी ढांचे को 5 सालों में ही खत्म कर दिया गया”..जनसरोकार सम्मेलन में बोली सोनिया गांधी
सोनिया गांधी ने कहा कि यूपीए सरकार की अधिकार-आधारित नीतियों ने करोड़ों लोगों को अपने सपनों को हासिल करने की अनुमति दी थी.
लोकसभा चुनाव से ठीक पहले लोगों के मुद्दों को उठाने के लिए 6 अप्रैल को तालकटोरा स्टेडियम में जन सरोकार सम्मेलन 2019 का आयोजन किया गया. जिसमें यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी भी शामिल हुई.
जन सरोकार सम्मेलन में सोनिया गांधी ने कहा कि कुछ साल पहले हम ये सोच भी नहीं सकते थे कि हमें ऐसे हालात में यहां एकत्र होना पड़ेगा. पिछले कुछ वक्त से हमारे देश की मूल आत्म को एक सोची-समझी साजिश के जरिए जिस तरह कुचला जा रहा है. वह हम सभी के लिए बेहद चिंताजनक बात है. जिन संस्थाओं ने हमें बुलंदियों तक पहुंचाया, उन्हें जानबूझ कर करीब-करीब खत्म कर दिया गया है.
उन्होंने कहा कि, “65 सालों में बड़ी मेहनत से तैयार किए गए जनकल्याण के बुनियादी ढांचे और सर्व समावेशी ताने-बाने को वर्तमान सरकार ने पूरी तरह से नष्ट करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. आज हमें देशभक्ति की नई परिभाषा सिखाई जा रही है. विविधताओं को अस्वीकार करने वालों को देशभक्त बताया जा रहा है. जाति-धर्म के आधार पर अपने ही नागरिकों में भेदभाव को उचित ठहराया जा रहा है. हमसे उम्मीद की जा रही है कि खान-पान, पहनवा भाषा और अभिव्यक्ति की आजादी के मामले में कुछ लोगों की मनमानी को हम बर्दाश्त करें.”

यूपीए अध्यक्ष ने मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि “वर्तमान सरकार असहमति को स्वीकार करने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है. जब लोगों पर हमले होते हैं तो सरकार अपना मुंह फेर लेती है. मौजूदा सरकार कानून और व्यवस्था को बनाए रखने की अपनी बुनियादी जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए तैयार नहीं है. वर्तमान सरकार करोड़ो देशवासियों से उनकी जिंदगी बेहतर बनाने की संभावनाएं छीन रही है. वे ऐसी नीतियां बना रहे हैं जिससे उनसे कुछ धनी पूंजीवादी और कारोबारी मित्रों को लाभ पहुंचात है हमें पूरी हिम्मत के साथ इसका विरोध करना होगा.”

“भारत को ऐसी सरकार की जरूरत है जो अपने सभी नागरिकों के प्रति उत्तरदायी हो. जो अपने संकल्पों के प्रति गंभीर और अपने काम-काज में निष्पक्ष हो. हमें संविधान में जिस बुनियादी स्वतंत्रता और अधिकारों की बात लिखी गई है उसे फिर से स्थापित करना होगा. हमें उन संवैधानिक मुद्दों को फिर बहाल करना होगा. एक-एक व्यक्ति की सुरक्षा और गरिमा को सुनिश्चित करनी होगा और संसाधनों पर सभी को समान अधिकार देना होगा.”

सोनिया गांधी ने कहा, “ऐसी उपलब्धियों को हासिल करने का हम कोई भी मौका खाली नहीं जाने देंगे, जिनसे जन-सरोकारों को मजबूती मिलती है. मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि इन चुनावों के दौरान जो वादे किए जा रहे हैं, सरकार बनने पर उनके अमल पर निगाह रखने के लिए बाकायदा व्यवस्था की जाएगी. भारत को एक ऐसा देश बनाने की दिशा में कदम उठाएंगे,जहां वादों का सम्मान होता है, जहां सरकार जो कहती है वह करती भी है. सरकार की ज़ुबान में वजन होना चाहिए. उसके शब्दों और कर्मों में फर्क नहीं होना चाहिए. हमने पहले भी यह करके दिखाया है, हम आगे भी यह करके दिखाएंगे. हमने पहले भी करके दिखाया और आगे भी करके दिखाएंगे.”
यूपीए अध्यक्ष ने कहा कि, “आज के इस महत्वपूर्ण अवसर पर मुझे पंडित जवाहरलाल नेहरू की कही वह बात याद आती है, जिसमें उन्होंने यह भावना व्यक्त की थी, कि भविष्य का निर्माण करते हुए सुविधा या आराम के लिए कोई जगह नहीं होती है, बल्कि अपने संकल्पों को पूरा करने के लिए, बिना थके मेहनत करनी होती है. इसलिए मैं आपसे कहती हूं कि आज जिस संकल्प को अपने मन में लेकर हम यहां इकट्ठा हैं, उसे सचाई में तब्दील करने के लिए हमें भी संघर्ष में पीछे नहीं रहना है.”
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