सीबीआई विवाद: इन सात संवेदनशील मामलों की जांच कर रहे थे सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा
सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा राफ़ेल विमान सौदा, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और मेडिकल एडमिशन में कथित भ्रष्टाचार जैसे मामलों की जांच कर रहे थे।
सरकार ने सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को लंबी छुट्टी पर भेज दिया है। उनकी जगह पर सीबीआई के संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर को बहाल किया गया है। आलोक वर्मा राफ़ेल सौदा, कोयला खदान आवंटन, स्टर्लिंग बायोटेक जैसे कई संवेदनशील मामलों की जांच कर रहे थे।
विपक्षी पार्टियों ने आलोक वर्मा को हटाए जाने के सरकार के फ़ैसले की भर्त्सना की है। विपक्ष का कहना है कि आलोक वर्मा कुछ संवेदनशील मुद्दों की जांच कर रहे थे जो सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता था। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक आलोक वर्मा जिन संवेदनशील मुद्दों की जांच में शामिल थे वे इस प्रकार से हैं:
राफ़ेल विमान सौदा: सबसे जरूरी मामला राफ़ेल सौदे की जांच को लेकर था। राफ़ेल सौदे में कथित घोटले का लेकर पूर्व भाजपा नेता यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने 4 अक्टूबर को सीबीआई में 132 पेजों का शिकायत पत्र दिया था, जिसे आलोक वर्मा ने स्वीकार कर लिया गया था। इस शिकायत के सत्यापन प्रक्रिया पर जल्द ही फैसला लिया जाना था।
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया: सीबीआई आलोक वर्मा की निगरानी में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया में कथित भ्रष्टाचार की जांच कर रही थी। इस मामलें में हाई-प्रोफाइल लोगों की भूमिका को लेकर जांच की जा रही थी। हाईकोर्ट के सेवानिवृत न्यायाधीश आईएम कुद्दूसी को इस मामले में गिरफ्तार भी किया गया था। कुद्दूसी के ख़िलाफ़ चार्जशीट तैयार कर ली गई थी और इसमें सिर्फ आलोक वर्मा का हस्ताक्षर होना बाकी था।
नितिन संदेसरा और स्टर्लिंग बायोटेक मामला: इन दोनों मामलों की जांच भी आलोक वर्मा की देखरेख में की जा रही थी। इस मामले में सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना की भूमिका को लेकर भी जांच की गई थी।
मेडिकल एडमिशन: मेडिकल एडमिशन में भ्रष्टाचार को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस एसएन शुक्ला पर आरोप थे और इस मामले में प्राथमिक जांच पूरी हो गई थी और इस पर केवल आलोक वर्मा का हस्ताक्षर करना बाकी था।
सुब्रह्मण्यम स्वामी: भाजपा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी द्वारा वित्त और राजस्व सचिव हसमुख अढ़िया के ख़िलाफ़ की गई शिकायत की जांच भी आलोक वर्मा के निगरानी में की जा रही थी।
कोयला खदान मामला: सीबीआई प्रधानमंत्री के सचिव आईएएस अफसर भास्कर कुल्बे की कोयला खदानों के आवंटन में भूमिका को लेकर जांच कर रही है।
पीएसयू में उच्च पदों पर नियुक्ति के लिए रिश्वतखोरी: दिल्ली स्थित एक बिचौलिए के यहां अक्टूबर में छापा मारा गया था। इस छापे में तीन करोड़ रुपये का कैश बरामद हुआ था। सीबीआई को पता चला था कि उक्त बिचौलिए ने पीएसयू में सीनियर पदों पर नियुक्ति के लिए नेताओं और अधिकारियों को रिश्वत दिया था।
ग़ौरतलब है कि पद से हटाए जाने के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी दी है। इस याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई होनी है।