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सीलिंग विवाद: कोर्ट ने मनोज तिवारी को कहा कि पता चल गया कितने नीचे गिर सकते हैं

तिवारी के ख़िलाफ़ ईडीएमसी ने प्रथामिकी दर्ज करवाई थी जिसके बाद उन पर अदालत के आदेश की अवमानना करने के लिए मुक़दमा चलाया जा रहा था.

सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को भाजपा सांसद मनोज तिवारी के ख़िलाफ़ चल रहे अवमानना मामले की कार्रवाई को समाप्त कर दिया है. लेकिन इसके साथ ही कोर्ट द्वारा तिवारी के रवैये की कड़ी आलोचना भी की गई.

जनसत्ता की रिपोर्ट के अनुसार न्यायमूर्ति मदन बी. लोकूर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अदालत से अधिकार प्राप्त समिति के ख़िलाफ़ तिवारी ने ओछे और घिनौने आरोप लगाए थे, जिससे यह पता चलता है कि “वे कितना नीचे गिर सकते हैं”. कोर्ट ने आगे यह भी कहा कि ग़लत राजनीतिक दुष्प्रचार के लिए कोई जगह नहीं है और इसकी निंदा की जानी चाहिए.

ज्ञात हो कि उत्तर पूर्वी दिल्ली के गोकलपुरी इलाके में चल रही सीलिंग को मनोज तिवारी ने तोड़ दिया था. इसके बाद उनके ख़िलाफ़ ईडीएमसी ने प्रथामिकी दर्ज करवाई थी. 19 सितंबर को कोर्ट ने तिवारी के ख़िलाफ़ अवमानना का नोटिस जारी किया था. तिवारी ने अदालत से अधिकार प्राप्त निगरानी समिति पर आरोप लगाते हुए कहा था कि सीलिंग के मुद्दे पर समिति दिल्ली के लोगों को आतंकित कर रही है और उसने अपने अधिकारों का ग़लत फायदा उठाया है.

तिवारी ने आगे कहा कि समिति ने जिन अनधिकृत कॉलोनियों में सीलिंग अभियान चलाया,  उन्हें कानून के तहत संरक्षण प्राप्त हैं. तिवारी के आरोपों पर पलटवार करते हुए समिति ने कहा कि तिवारी अदालत को राजनीतिक अखाड़ा बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

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