सीबीआई विवाद: अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव की नियुक्ति के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, नियुक्ति रद्द करने की मांग
याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण ने कहा है कि नागेश्वर राव की नियुक्ति में मोदी सरकार ने मनमानी की है.
सीबीआई के अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव की नियुक्ति को ग़ैरकानूनी बताते हुए उसे रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली गई है. यह याचिका एक एनजीओ ने डाली है. आलोक वर्मा को निदेशक पद से हटाने के बाद मोदी सरकार ने नागेश्वर राव को अंतरिम निदेशक बनाया था.
द टेलीग्राफ़ के मुताबिक याचिका में कहा गया है कि सीबीआई के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा को हटाने के बाद सरकार ने बिना उच्च स्तरीय कमेटी की सहमति के नागेश्वर राव की बहाली कर दी गई. इस कमेटी में प्रधानमंत्री, देश के प्रधान न्यायाधीश और नेता विपक्ष शामिल होते हैं.
द टेलीग्राफ़ के मुताबिक वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण द्वारा दायर इस याचिका में नागेश्वर राव की नियुक्ति को ग़ैर कानूनी, मनमाना और बुरी नीयत से लिया गया फ़ैसला बताया है. इस नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट के 8 जनवरी के फ़ैसले और दिल्ली स्पेशल पुलिस स्थापना अधिनियम (जो सीबीआई को नियंत्रित करता है ) का उल्लंघन भी बताया गया है.
कोर्ट के फ़ैसले और उक्त कानून के मुताबिक सीबीआई निदेशक की नियुक्ति या ट्रांसफर को सिर्फ और सिर्फ सेलेक्शन कमेटी ही तय कर सकती है. अभी इस याचिका पर सुनवाई की जानी बाकी है. इसमें सीबीआई के नए निदेशक की नियुक्ति में पारदर्शिता बरतने की बात भी कही गई है.
याचिका में कहा गया है कि नागेश्वर राव की नियुक्ति में जाहिर तौर पर उच्च स्तरीय सेलेक्शन कमेटी की राय नहीं मांगी गई है. ऐसा लगता है कि भारत सरकार ने कमेटी को पूरी तरह से नज़रअंदाज किया और मनमाने तरीके से राव की बहाली की.
बता दें कि सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और संयुक्त निदेशक राकेश अस्थाना को सरकार ने एक विवाद के बाद लंबी छुट्टी पर भेज दिया था. सरकार के इस फ़ैसले को वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसपर कोर्ट ने आलोक वर्मा के पक्ष में अपना फ़ैसला दिया. लेकिन, प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय कमेटी ने एक बार फिर से आलोक वर्मा को पद से हटा दिया.