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फरवरी 2018 में जेटली ने कहा सैनिटरी पैड पर लगे जीएसटी को हटाने की मांग के पीछे चीनी कंपनियां हैं। जुलाई 2018 में मोदी सरकार ने छूट मंज़ूर कर दी।

भाजपा यह तय नहीं कर पा रही है कि यह भारतीय निर्माताओं के लिए वरदान है या श्राप

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार ने सैनिटरी पैड पर वस्तु एवं सेवा कर बीते शनिवार को हटा दिया है जिसका सोशल मीडिया पर बहुत लोगों के द्वारा स्वागत किया गया है।

जुलाई 2017 से सैनिटरी पैड पर 12% का जीएसटी लगा हुआ था। बहरहाल, बीते शनिवार के पहले तक भाजपा सरकार ने सैनिटरी पैड पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगाने के फैसले का कई बार बचाव किया। पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने तो एक बार सैनिटरी पैड पर लगे जीएसटी की बहस को एक जानकारी के अभाव में होने वाली बहस के रूप में घोषित कर दिया।

भाजपा सैनिटरी पैड पर लगे जीएसटी का बचाव करते हुए

नवम्बर 2017 में हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट में जेटली से यह सवाल किया गया था कि कैसे महिलाओं के लिए सैनिटरी पैड जैसी बुनियादी स्वास्थ्य रक्षा की सामग्री पर इतना ज़्यादा कर लगाया जा सकता है?

उस समय जेटली ने कहा था, “जीएसटी लागू होने से पहले कुछ छुपे हुए शुल्क की वजह से सैनिटरी पैड के दाम पर 13 प्रतिशत का कर लगता था। इसको जीएसटी के तहत कम कर 12 प्रतिशत कर दिया गया है। चूँकि इनपुट क्रेडिट सिस्टम की वजह से उत्पादन मूल्य में कमी आई है, इसलिए ग्राहकों तक इसका फायदा कम आधार मूल्य के रूप में हो सकता है। न सिर्फ इनपुट टैक्स क्रेडिट की वजह से स्वदेशी उत्पादकों को बढ़ावा मिलता है, बल्कि यह उन्हें चीनी आयात से भी बचाता है।”

उन्होंने आगे कहा, “यह इसलिए है क्योंकि चीनी आयत का भारतीय उत्पादों से कम आधार मूल्य है। सैनिटरी पैड पर से जीएसटी को पूरी तरह से हटा देना से भारतीय उत्पादकों को इनपुट क्रेडिट में नुक्सान होगा और उससे उतपादन मूल्य में और बढ़ोतरी आएगी। इसलिए, जीएसटी भारतीय उत्पादों को स्पर्धात्मक बनाये रखती है।”

हाल ही में फरवरी 2018 में जेटली ने अपने इस स्पष्टीकरण को एक भारतीय न्यूज़ चैनल, इंडिया टीवी में भी दोहराया था। जेटली ने यहाँ तक कह दिया कि सैनिटरी पैड पर लगे जीएसटी को हटाने की मांग के पीछे चीनी कंपनियों का बहुत बड़ा हाथ है।

उन्होंने कहा था, “गाँवों में जिन स्व-सहायता समूहों द्वारा पैड का उत्पादन किया जाता है वो सभी 20 लाख रु. के नीचे हैं इसलिए उन पर जीएसटी नहीं लागू होता है। उत्पादन के बाद बड़ी भारतीय कंपनियां इनपुट क्रेडिट के बाद बहुत कम कर चुकती हैं।

मान लीजिये कि अगर हम कर 0% कर दें, तो कुछ भारतीय कंपनियों को उससे 3-4% का लाभ होगा। लेकिन वो सब चीनी कंपनियों जिन्हें सीमा शुल्क के अलावा 12% आईजीएसटी देना पड़ता, वो सब फिर उन्हें कुछ भी नहीं देना पड़ेगा। और सैनिटरी पैड की मेक इन इंडिया ब्रांड बिलकुल नीचे गिर जायेगा और चीनी कंपनियों एकाधिकार स्थापित हो जायेगा।”

उन्होंने कहा, “अगर आप चाहते हैं कि सैनिटरी पैड सिर्फ चीनी कंपनियों द्वारा बेची जाए तो फिर न कोई ग्रामीण स्व-सहायता समूह बचेंगे और न ही स्वदेशी कंपनियां। कभी कभी जब सतही तौर पर इन मांगों के बारे में सोचता हूँ तो लगता है कि यह महिलाओं की मांग है पर गहरा विचार करने पर मुझे असलियत का पता लगता है।”

अब मोदी सरकार से एक सवाल यह है कि हमें तब बेवकूफ बनाया जा रहा था या आज बनाया जा रहा है?

क्या सच में भाजपा भारतीय उत्पादकों को बचाना चाह रही थी या इस बात को स्वीकार करने की शर्मिंदगी से ख़ुद को बचाना चाहती है कि सैनिटरी पैड पर जीएसटी लगना ही नहीं चाहिए था।

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