साईंबाबा के मंदिर का भी हुआ भगवाकरण, सबका मालिक एक के स्थान पर अब ऊँ साईंनाथाय नम:
मंदिर परिसर में ट्रस्टियों के रूप में मौजूद सभी सदस्य भाजपा से जुड़े हैं.
देश में साईं बाबा द्वारा दुनिया को दिए गए संदेश “सबका मालिक एक” से सभी भारतीय अवगत होंगे. लेकिन डेढ़ सौ साल पहले दिए इस संदेश को शिर्डी संस्थान में भाजपा से जुड़े कुछ लोगों की नियुक्ति के बाद साईं बाबा का प्रचार ऊँ श्री साईंनाथाय नम: के तौर पर शुरू कर दिया गया है. साईं संस्थान के सभी प्रकाशनों और तस्वीरों पर हमेशा से दिखाई देने वाले संदेश सबका मालिक एक के स्थान पर ऊँ श्री साईंनाथाय नम: नज़र आने लगा है.
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार भाजपा सदस्यों ने केवल साईंबाबा के मंदिर या उनके संदेश के साथ ही छेड़छाड़ नहीं की है. साठ सालों तक साईंबाबा जिस स्थान पर रहे उसका नाम द्वारकामाई मस्जिद था. अब उसका भी बदलकर बोर्ड पर द्वारकामाई मंदिर लिख दिया है और मंदिर में जगहों को बताने वाले साइन बोर्ड का रंग भी भगवा कर दिया गया है.
साईं संस्थान के पूर्व प्रशासकीय अधिकारी सुभाष जगताप का कहना है कि यह लोग साईं के सिद्धांतों से भटक रहे हैं. उन्होंने कहा कि साईंबाबा कहते थे कि राम-रहीम एक हैं, हिंदू-मुस्लिम में एकता होगी तो ही परमार्थ साधा जा सकेगा. मानवता ही उनका धर्म था. इसलिए हर जाति-धर्म के व्यक्ति उनके भक्त हैं. उन्होंने कहा कि साईं सच्चरित्र में इस बात का उल्लेख किया गया है.
वहीं दूसरी ओर शिर्डी गजेटीयर के लेखक प्रमोद आहेर ने आरोप लगाते हुए कहा कि साईंबाबा पर एक धर्म का लेबल लगाने का सुनियोजित प्रयास किया जा रहा है. शताब्दी वर्ष के मौके पर कुंभ मेले में ध्वज-स्तंभ बनाया गया. उस पर त्रिशूल और ऊँ के चिह्न हैं, जबकि ध्वज पर सारे धर्मों के प्रतीक चिह्न बनाए जाने थे.
साईंबाबा का इस प्रकार से भगवाकरण किए जाने से देश-विदेश के भक्त काफी दुखी हैं. अमेरिकन एयरवेज़ में अधिकारी मिस क्लॉड रॉड्रीगेज साईंबाबा की भक्त हैं. इस मामले की जानकारी मिलने पर उन्होंने पूछा, “मंदिर में सबका मालिक एक के स्थान पर ऊँ शब्द कहां से आ गया. मैं ईसाई हूं और हर रविवार पूरे परिवार के साथ साईंबाबा के मंदिर जाती हूं. वहां सभी देवताओं के दर्शन करने का संतोष प्राप्त होता है. लेकिन शिर्डी आने पर इस विवाद और ध्वज-स्तंभ पर केवल ऊँ शब्द देखकर बहुत दुख हुआ.”
ज्ञात हो कि 2004 में कांग्रेस की सरकार ने साईंबाबा मंदिर को सरकारी नियंत्रण में लिया था, जिसके बाद राज्य के विधि व न्याय विभाग ने ट्रस्ट बोर्ड में नियुक्ति के नियम भी बनाए गए. ट्रस्टियों की नियुक्ति राज्य सरकार और न्याय मंत्रालय द्वारा की जाती है. न्यासमंडल में 17 न्यासियों को नियुक्त करने का प्रवाधान है. लेकिन गौरतलब है कि इस वक्त केवल 6 सदस्य की ही नियुक्ति है, जिनकी नियुक्ति भाजपा सरकार द्वारा की गई थी. सभी 6 सदस्य भाजपा से जुड़े लोग हैं.
साईं संस्थान में ट्रस्टी रह चुके सुरेश वाबले पाटील का कहना है कि जब से साईं संस्थान की स्थापना हुई है तब से 2016 तक शिर्डी में सबका मालिक एक संदेश का ही पालन किया गया. लेकिन भाजपा सरकार द्वारा नियुक्त ट्रस्टियों ने साईंबाबा के मंदिर और संदेश का भगवाकरण करने का कार्य किया है. हालांकि तमाम आरोपों पर मंदिर ट्रस्टियों की ओर से कोई टिप्पणी नहीं की गई.
साईंबाबा के मंदिर में एक भक्त ने भाजपा द्वारा ट्रस्टियों की नियुक्ति को लेकर हाई कोर्ट में याचिका भी दायर की थी. कोर्ट ने सरकार को जांच के आदेश दिए थे. बीते 20 नवंबर को एक समिति का गठन किया गया जो साईं संस्थान के ट्रस्टियों की नियुक्ति नियमानुसार होने या न होने की जांच करेगी.