सबरीमला फैसला : भाजपा सदस्य कोल्लम तुलसी का अपराधिक बयान, कहा मंदिर में प्रवेश करने वाली महिलाओं के दो टुकड़े करने चाहिए
तुलसी ने सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की अवहेलना करते हुए कहा कि सबरीमला पर फैसला सुनाने वाले 4 जज बेवकूफ हैं।
सर्वोच्च न्यायालय के सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति देने के फैसले के ख़िलाफ़ लगातार आ रही प्रतिक्रियाओं की फेहरिस्त में एक और बेहूदी प्रतिक्रिया जुड़ गई। बीते बुधवार को एक कार्यक्रम में मलयालम फिल्मों के जाने माने अभिनेता और भाजपा सदस्य कोल्लम तुलसी ने कहा कि सबरीमला मंदिर में प्रवेश करने वाली महिलाओं के दो टुकड़े कर देने चाहिए। एक टुकड़ा दिल्ली और दूसरा टुकड़ा तिरुवनंतपुरम में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के कार्यालय में फेंक दिना चाहिए।
दरअसल केरल सरकार ने सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर करने से मना कर दिया था। सरकार का कहना था कि वह शीर्ष अदालत के फैसले का सम्मान करती है। लेकिन भाजपा अदालत के फैसले के ख़िलाफ़ है जिसके चलते पार्टी केरल के विभिन्न क्षेत्रों में मार्च और कार्यक्रम कर रही है। इसी क्रम में शुक्रवार को कोल्लम में एक मार्च किया गया था। भाजपा के नेतृत्व वाली सबरीमला रक्षा राज्यरैली 15 अक्टूबर को राजधानी में समाप्त होगी।
द वायर की रिपोर्ट के अनुसार जिस कार्यक्रम में मलयाली अभिनेता ने महिलाओं को लेकर इस तरह का आपराधिक बयान दिया था उस कार्यक्रम में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष पीएम श्रीधरन पिल्लई भी मौजूद थे। इस रैली के दौरान तुलसी ने अपने संबोधन में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की अवहेलना करते हुए कहा कि वे 4 जज जिन्होंने सबरीमला पर फैसला सुनाया है, वे बेवकूफ हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जो बुज़ुर्ग महिलाएं इस फैसले के ख़िलाफ़ हैं उन्हें सबरीमला मंदिर जाना चाहिए और मंदिर में प्रवेश करने वाली महिलाओं के टुकड़े कर देने चाहिए। तुलसी ने लोगों से कहा कि वे अयप्पा का नाम इतनी तेज़ आवाज़ में जपें कि पिनाराई विजयन के कान फट जाएं और सुप्रीम कोर्ट में बैठे बेवकूफों तक भी पहुंचे।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा था कि सरकार सबरीमला मंदिर जाने वाली महिला की सुरक्षा और उन्हें मिलने वाली सुविधाएं सुनिश्चित करेगी। तुलसी के विवादित बयान के बाद शनिवार को पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। भाजपा का कहना है कि यह प्रदर्शन केरल तक ही सीमित नहीं रहेगा, इस प्रदर्शन को दक्षिण भारत के अन्य राज्यों तक ले जाया जाएगा। भाकपा के राज्य सचिव कन्नम राजेंद्रन ने कहा एलडीएफ श्रद्धालुओं के ख़िलाफ़ नहीं है। सरकार उच्चतम न्यायालय के आदेश को लागू करने को बाध्य कर रही है और इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोशिश की जा रही है।
महिलाओं सहित कांग्रेस कार्यकर्ताओं के एक समूह ने ‘त्रावणकोर देवाश्म बोर्ड’ के कार्यालय के सामने धरना दिया और ‘सबरीमला मंदिर की रक्षा करें’ के नारे लगाए गए। यह बोर्ड मंदिर की देखरेख करता है। केपीसीसी अभियान समिति के अध्यक्ष के मुरलीधरन ने विरोध मार्च निकाल रही भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि अगर केंद्र सरकार मंदिर के रीति-रिवाजों और परंपराओं में अदालत के हस्तक्षेप को रोकने के लिए कानून ले आए तो यह मामले को सुलझाया जा सकता है।
एक तरफ जहां पूरी दुनिया महिलाओं के लिए समानता के अधिकार की लड़ाई लड़ रही हैं और मासिक धर्म एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया के रूप में समझने की कोशिश कर रही है, वहीं धार्मिक कट्टरपंथी मासिक धर्म को वजह बताकर महिलाओं के मंदिर में प्रवेश को बाधित करने के लिए अपना पूरा ज़ोर लगाने में लगे हुए हैं। शुक्रवार को चेन्नई के वेल्लुवर कोट्टम में भगवान अय्यप्पा की महिला भक्तों ने मंदिर की परंपरा का पालन करने की शपथ ली। श्रद्धालुओं ने हाथों ‘परंपरा बचाओ’ के बैनर और पोस्टर लिए हुए थे। उनका कहना है कि भगवान अय्यप्पा एक ‘ब्रह्मचारी’ थे और इसलिए यह परंपरा बनाई गई थी कि मासिक धर्म की अवधि वाली उम्र को पार करने के बाद ही महिलाएं मंदिर में जा सकती हैं।