भारत छोड़ो आंदोलन में वाजपेयी की भूमिका को लेकर सवाल उठाने पर राज्यसभा टीवी एंकर पड़ी मुसीबत में, महीने भर हो गए स्क्रीन पर नहीं हुई वापसी
एंकर नीलू व्यास ने 8 अगस्त को एए राव पर उनके उत्पीड़न और दखलंदाजी करने और अभद्र टिप्पणी करने का आरोप लगाया था।
अभिव्यक्ति को लेकर इस देश में परिस्थितियां बहुत ख़राब हो चुकी हैं। अपने विचार सामने रखने की लोगों को क़ीमत चुकानी पड़ रही है। अभिव्यक्ति से सीधे तौर पर जुड़े व्यवसायिक यानी कि पत्रकार आज के समय में इससे सबसे ज़्यादा प्रभावित हो रहे हैं। ताज़ा मामले में राज्य सभा टीवी एंकर नीलू व्यास को भारत छोड़ो आंदोलन में वाजपेयी की भूमिका से जुड़ा सवाल करने पर नोटिस थमा दिया गया। इतना ही नहीं, चैनल को अपने एंकर के इस सवाल के लिए माफ़ी मांगनी पड़ी। एंकर को फटकार लगाई गई और उसे ऑफ एयर कर दिया गया।
गौरतलब है कि चैनल पर 16 अगस्त को हुई चर्चा के दौरान वरिष्ठ पत्रकार और एंकर नीलू व्यास ने स्टूडियो में आए एक मेहमान विजय त्रिवेदी से 1942 की घटना को लेकर सवाल पूछा था। व्यास ने पूछा था कि “अटल जी ने 1942 के दौरान मैं अब अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ नारे नहीं लगाऊंगा की बात कैसे स्वीकार कर ली जबकि वे हमेशा अपने राष्ट्रवादी रुझान के लिए जाने जाते थे?”
इस सवाल के जवाब में विजय त्रिवेदी, जो कि 2016 में प्रकाशित वाजपेयी की जीवनी हार नहीं मानूंगा के लेखक हैं, ने कहा कि “उस समय अटल जी की उम्र महज़ 17 साल की थी। अटल जी ने कभी इस बात को लेकर खंडन नहीं किया, न ही इसकी कभी पुष्टि की, न ही कभी उन्होंने इस बारे में बात की। लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि कोई उनके राष्ट्रवादी चरित्र पर सवाल उठा सकता है।”
इस चर्चा के बाद एक हिंदी वेबसाइट में इससे संबंधित ख़बर छपने पर राज्यसभा के अधिकारियों के बीच यह मामला संज्ञान में आया।
द वायर के अनुसार इसके ठीक बाद राज्यसभा सचिवालय के अतिरिक्त सचिव एए राव और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू के करीबी माने जाने वाले एक नौकरशाह ने चैनल से इस मामले में कार्रवाई की मांग की।
नायडू के समक्ष जब मामला संज्ञान में आया तो उन्होंने चैनल को माफ़ीनामा जारी करने के आदेश दिए। इसके बाद चैनल के संपादक महाजन ने इस संबंध में नीलू व्यास से स्पष्टीकरण देने को कहा।
द वायर के अनुसार एंकर नीलू व्यास ने कहा कि “त्रिवेदी से सवाल पूछने के पीछे की उनकी मंशा यह दिखाने की थी कि किस तरह कद्दावर नेता को भी ऐसे क्षणों का सामना करना पड़ा था, लेकिन इन सबके बीच से वे विजयी होकर निकले। बस इस सवाल से जनता को याद दिलाना था कि सारी बाधाओं को, जिनमें अंग्रेजों द्वारा उनसे लिखवाया गया एक शपथ पत्र भी था, इससे हमारे दिवगंत प्रधानमंत्री का करिश्मा और निखर कर सामने आया।”
मामला अटल बिहारी वाजपेयी के चर्चा तक ही सीमित नहीं। गौरतलब है कि नीलू व्यास ने 8 अगस्त को एए राव पर उनके उत्पीड़न और दखलंदाजी करने और अभद्र टिप्पणी करने का आरोप लगाया था।
द वायर के अनुसार राज्यसभा के सचिव पीपी के रामाचार्युलू ने बताया कि शिकायत पर विचार किया जा रहा है। पर उन्होंने यह नहीं बताया कि क्या इसे सचिवालय की आतंरिक शिकायत समिति के पास भेजा गया है या नहीं।
नीलू व्यास ने इस मामले में कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जैसे ऊंचे पद स्त्री उत्पीड़न के मामले में स्थापित कानून और व्यवहारों के अनुसार अपने कर्तव्यों का निर्वाह करने में असफल साबित हो रहे हैं। कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में महिला आयोग या न्यायालय का दरवाजा खटखटाऊंगी।”
चैनल संपादक को कहा गया था कि इस एंकर को दो हफ्ते के लिए एंकरिंग से दूर रखा जाए। लेकिन चैनल में इस पत्रकार की अब तक वापसी नहीं हुई है।
वर्त्तमान स्थिति में सवाल पूछना अपराध की श्रेणी में आ चूका है। हाल ही में ऐसा ही एक और मामला देखा गया था जिसमें वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी को सरकारी योजनाओं में हो रहे अनियमितताओं पर सवाल उठाने के लिए अपनी नौकरी से इस्तीफ़ा देना पड़ गया था।