सवर्णों को आरक्षण: केजरीवाल बोले- अब संविधान में संशोधन करे सरकार, नहीं तो यह महज़ चुनावी जुमला
आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने से पहले संविधान संशोधन की आवश्यकता होगी.
नरेन्द्र मोदी सरकार ने लोकसभा चुनावों को देखते हुए आर्थिक रूप से पिछड़े सभी धर्म के पिछड़ों को आरक्षण देने का फ़ैसला किया है. चुनाव का आचार संहिता लागू होने से चंद महीने पहले सरकार का यह फ़ैसला महज चुनावी स्टंट की तरह दिखता है.
सरकार के इस फ़ैसले पर कांग्रेस ने कहा है कि वह गरीब और पिछड़ों के हित के लिए सरकार द्वारा उठाए गए हर कदम का स्वागत करती है. इसके साथ ही कांग्रेस ने इस फ़ैसले की संवैधानिक चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया है.
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने कहा है कि मैं सरकार के इस फ़ैसले का स्वागत करता हूं. सरकार को संसद के सत्र का विस्तार कर संविधान में संशोधन करना चाहिए. अगर सरकार ऐसा नहीं करती है तो यह महज एक चुनावी स्टंट कहा जाएगा.
I agree. The govt shud extend Parl session and bring constitutional amendment immediately. Else it is merely an election stunt. https://t.co/J5weTkG5cA
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) January 7, 2019
सरकार के इस फ़ैसले पर पत्रकार अंकुर भारद्वाज का कहना है कि शीतकालीन सत्र के दो दिन बचे होने पर सरकार ने यह फ़ैसला किया है. इसके लिए सरकार संविधान संशोधन विधेयक ला रही है? उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल में नौकरियां देने और अन्य मुद्दे पर विफ़ल होने के कारण मोदी सरकार ने जनता को यह लॉलीपॉप थमाने की कोशिश की है.
Wah! Just two days before the winter session ends, Modi govt okays quota for economically weaker upper castes. When does it intend to bring the constitutional amendment? This is the last session before code of conduct comes into play .
As Shri Modi would say: Lollipop.— Ankur Bhardwaj (@Bhayankur) January 7, 2019