क्या बागी ही ढाहेंगे राजे का किला? आपसी रंजिश के दलदल में फंसी भाजपा
नाराज़ सदस्यों को मनाने के लिए केंद्रीय स्तर के 14 नेता राजस्थान पहुंचे.
राजस्थान में आगामी चुनावों के लिए नामांकन प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है और नामांकन वापस लेने के लिए प्रत्याशियों के पास 22 नवंबर तक का समय शेष है. ऐसे में भाजपा अपने नाराज़ मंत्रियों, विधायकों को मनाने के कार्य में जुट गई है. ताकि पार्टी के ख़िलाफ़ नामांकन करने वाले प्रत्याशियों को नामांकन वापस लेने के लिए मनाया जा सके. नाराज़ पार्टी सदस्यों को मनाने के लिए केंद्रीय स्तर के 14 नेता राजस्थान पहुंचे हैं.
आगामी चुनावों से पहले भाजपा से कई विधायकों और मंत्रियों ने पार्टी छोड़कर विपक्षी पार्टियों में शामिल होना उचित समझा या फिर निर्दलीय नामांकन भर पार्टी से टक्कर लेने का फ़ैसला कर लिया. गौरतलब है कि भाजपा से नाराज़ सदस्यों की सूची काफी लंबी है, जिसमें राजे सरकार में मंत्री रहे सुरेंद्र गोयल, राजकुमार रिणवा, हेमासिंह भड़ाना और राज्यमंत्री संदीप यादव समेत कई मंत्रियों और विधायकों के नाम शामिल हैं.
जनसत्ता की रिपोर्ट के अनुसार राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि जिस पार्टी में जितने ज़्यादा नाराज़ बाग़ी होंगे, उस पार्टी को चुनावों में अधिक नुकसान होगा. इसलिए भाजपा की तरफ़ से स्वयं मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने नाराज़ प्रत्याशियों को मनाने का ज़िम्मा उठा लिया है. हालांकि नाराज़ मंत्रियों ने पार्टी के साथ सुलह करने से इंकार कर दिया है, जो पार्टी के लिए नुकसान का सबब बन सकता है.
वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस से नाराज़ मंत्रियों की संख्या भाजपा के मुकाबले कम है. कांग्रेस महासचिव अशोक गहलोत ने मंगलवार को कहा कि वे तीन दिनों के अंदर पार्टी से नाराज़ लोगों को मना लेंगे. ज्ञात हो कि राजस्थान में 200 विधानसभा सीटों के लिए 7 दिसंबर को मतदान होने हैं, जिनके नतीज़े 11 दिसंबर को सामने आएंगें.