पकौड़े तलने की बात नहीं, राहुल गांधी के पास है देश का स्पष्ट विजन, जानें कांग्रेस अध्यक्ष के हालिया इंटरव्यू की 5 मुख्य बातें
अगर कांग्रेस की सरकार आती है, तो इसे वन मैन शो की तरह नहीं चलाया जाएगा.
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने हाल के दिन में कई साक्षात्कार दिए हैं. 11 मई को राहुल गांधी ने एनडीटीवी के जानेमाने पत्रकार रवीश कुमार को लाइव इंटरव्यू दिया. राहुल गांधी इससे पहले हिन्दुस्तान टाइम्स, इंडिया टुडे, सीएनएन-न्यूज़18 और द इंडियन एक्सप्रेस जैसे मीडिया संस्थानों को इंटरव्यू दे चुके हैं.
प्रधानमंत्री मोदी के “ग़ैर-राजनीतिक” इंटरव्यू में “आम कैसे खाते हैं?” वाले सवाल पूछे जाते हैं, जबकि राहुल गांधी ने अपने इंटरव्यू में जरूरी मुद्दों पर अपना एक स्पष्ट विज़न रखा है. हम राहुल गांधी के इंटरव्यू से निकले इन्हीं 5 जरूरी बातों की चर्चा करेंगे.
उत्तर प्रदेश में अपनी जड़ें मजबूत करने के लिए लड़ रही है कांग्रेस
इंडिया टुडे से बातचीत में राहुल गांधी ने कहा था, “हम उत्तर प्रदेश में गठबंधन बनाना चाहते थे, लेकिन समाजवादी पार्टी और बसपा ने अकेले लड़ना उचित समझा. बड़े आदर के साथ मैंने उनके फ़ैसले का स्वागत किया, लेकिन उत्तर प्रदेश में हम अपनी ज़मीन बचाने के लिए लड़ाई लड़ेंगे. और मैंने प्रियंका और ज्योतिरादित्य को साफ तौर पर कहा है कि हमारा एकमात्र लक्ष्य उत्तर प्रदेश में भाजपा को हराना है.”
हालांकि राहुल गांधी ने कहा कि उनका पहला लक्ष्य बीजेपी को हराना है, इसके साथ ही उन्होंने कहा कि प्रियंका और ज्योतिरादित्य को निर्देश दिया है कि यूपी में कांग्रेस की विचारधारा की लड़ाई लड़े. एनडीटीवी से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा था, “अब उत्तर प्रदेश में हमारी लड़ाई स्पष्ट है. मैंने प्रियंका और ज्योतिरादित्य को कहा है कि पार्टी को विधानसभा चुनाव के लिए यूपी में मजबूत करें. और लोकसभा चुनाव में हम अपना स्पेस बनाने के लिए लड़ेंगे. हमें यह सुनिश्चित करना है कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की विचारधारा बची रहे. जहां भी हमें लगे कि सपा-बसपा गठबंधन और भाजपा के बीच सीधी लड़ाई है, वहां हम गठबंधन का समर्थन करेंगे.”

विशेषज्ञों की राय लेने पर यकीन करते हैं राहुल गांधी
आरबीआई की चेतावनी के बावजूद भी देश में नोटबंदी की गई. ऐसे में देश में उस नेतृत्व की जरूरत है, जो एक्सपर्ट या विशेषज्ञों की राय पर यकीन रखता हो. अपने इंटरव्यू में राहुल गांधी कहते रहे हैं कि न्याय योजना के लिए उन्होंने दुनिया के बड़े अर्थशास्त्रियों की सलाह ली है. इंडिया टुडे से राहुल गांधी ने कहा था, “हमने न्याय के लिए एक मॉडल तैयार किया और इसकी जांच की. हमारी टीम ने कहा कि अर्थव्यवस्था को नुक़सान पहुंचाए बिना ही न्याय योजना लागू की जा सकती है. इस विचार को दुनिया के बड़े अर्थशास्त्रियों ने समर्थन दिया.”
एक कल्याणकारी राज्य की स्थापना
राहुल गांधी ने मुफ़्त स्वास्थ्य सेवा, मुफ़्त शिक्षा और न्याय के जरिए बैंक खाते में सीधे पैसे भेजने की बात कही है. इंडिया टुडे से बात करते हुए उन्होंने कहा, “हम शिक्षा और स्वास्थ्य के बजट में बढ़ोतरी करने जा रहे हैं और इससे लाखों नए रोज़गार पैदा होंगे. देश के शहरी इलाकों में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था और शिक्षा व्यवस्था की नितांत आवश्यकता है.”
डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने मनरेगा के रूप में विश्व की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना लागू की थी. इस पर कई अध्ययन किए गए, जिनसे मालूम चला कि इस योजना के चलते लाखों लोग ग़रीबी के दायरे से बाहर आ सके, विस्थापन में कमी आई और ग्रामीण परिवारों की आय में बढ़ोतरी हुई. यूपीए की सरकार ने शिक्षा का अधिकार कानून भी पास किया, जिससे देशभर में प्राथमिक शिक्षा को हर एक व्यक्ति के लिए मुफ़्त और अनिवार्य कर दिया गया. इन सबको ध्यान में रखते हुए कहा जा सकता है कि राहुल गांधी के वादे फ़ीके नहीं हैं.

राहुल स्वीकारते हैं यूपीए सरकार की कमियां,देते हैं नया विजन
राहुल गांधी ने अपने इस इंटरव्यू में यह भी माना है कि यूपीए सरकार के अंतिम सालों में देश की अर्थव्यवस्था के हालात ठीक नहीं थे. आर्थिक नीतियां कमजोर पड़ गई थीं. उन्होंने कहा है कि उनकी पार्टी ने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए विचार विमर्श किया है.
इंडिया टुडे से बातचीत में उन्होंने कहा है, “देश के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात है कि जो आर्थिक नीति 1990 में भारत के लिए कारगर थी, वह आज के लिए उपयुक्त नहीं है. मोदी जी इसे स्वीकार नहीं करना चाहते. हमने इस बात को स्वीकार किया है. हमारी आर्थिक नीति ने 2012 तक काम किया. इसके बाद वाले सालों में इसने काम करना बंद कर दिया. यूपीए सरकार के अंतिम दो साल के कार्यकाल में अर्थव्यवस्था के हालात कमजोर ही हुए. मोदी जी वही काम कर रहे हैं, जो यूपीए की सरकार ने 2012 से 2014 तक किए. इसके अलावे मोदी जी ने नोटबंदी जैसे फ़ैसले ले लिए, जिससे अर्थव्यवस्था को और भी नुक़सान पहुंचा.”
राहुल प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहते, पर कांग्रेस की मौजूदा स्थिति को वे समझते हैं:
राहुल गांधी से हर इंटरव्यू में एक सवाल जरूर पूछा गया कि क्या वो प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं. इसका जवाब भी राहुल ने बड़े ही संतुलित ढंग से दिया. ना ही उन्होंने हामी भरी ना सीधे तौर पर इससे इनकार किया. किसी भी बड़े नेता के लिए यह एक जरूरी बात होती है.

2014 के चुनाव में कांग्रेस को काफी कम सीटें आई थी. इसे ध्यान में रखते हुए राहुल गांधी चुनाव के बाद होने वाले गठबंधन के दलों से संबंध नहीं ख़राब करना चाहते. इसी कारण गठबंधन का नेतृत्व करने के सवाल पर राहुल संतुलित जवाब दे रहे हैं.