आरएसएस का संकीर्ण नज़रिया भारत जैसे लोकतांत्रिक देश के लिए समस्या- रघुराम राजन
राजन ने अपने साक्षात्कार में कहा कि “हमारा नज़रिया हमारे संस्थापकों गांधी, नेहरू के विचारों और संविधान पर आधारित है.”
भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन मोदी सरकार की नीतियों की आलोचना करते रहे हैं. लेकिन अब तक आरएसएस पर उनका मत जानने को नहीं मिला.
द विक को दिए अपने साक्षात्कार में पूर्व गवर्नर ने आरएसएस को लेकर अपना मत जाहिर किया. राजन का मानना है कि विश्व को लेकर आरएसएस का संकीर्ण दृष्टिकोण भारत जैसे लोकतांत्रिक देश के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है.
राजन ने अपने साक्षात्कार में कहा कि “हमारा नज़रिया हमारे संस्थापकों गांधी, नेहरू के विचारों और संविधान पर आधारित है. इसलिए मुझे ऐसा लगता है कि आरएसएस की यह संकीर्ण विचारधारा भारत के लोगों का उतनी आज़ादी प्रदान नहीं करता जिससे बाहर के विभिन्न समुदायों के साथ हमारी भागीदारी हों. यह लोकतांत्रिक देश के लिए समस्या खड़ा करने जैसा है. हम ऐसा होने नहीं दे सकते.”
उन्होंने कहा कि आरएसएस का यह उद्देश्य है, जिससे वे सहमत नहीं है.
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बारे में विचार व्यक्त करते हुए राजन ने कहा, “हरेक संस्था में कुछ अच्छे लोग होते हैं. वे ऐसे ही सम्मानीय और प्रशंसनीय सदस्य थे. अटल जी अच्छे नेता के साथ-साथ एक अच्छे इंसान भी थे.
बता दें कि रघुराम राजन अपनी तीसरी किताब ‘ द थर्ड पिलर’ को प्रमोट करने के लिए भारत आए हैं. इस किताब का विमोचन मंगलवार को किया गया. किताब को लेकर राजन ने कहा कि यह किताब आरएसएस जैसे लोकप्रिय राष्ट्रवादी संस्थाओं के उद्देश्यों के ख़िलाफ़ है.