राफेल मामले में सीपीआई (एम) नेता सीताराम येचुरी का पीएम मोदी पर हमला – कॉरपोरेट घरानों के लिए काम कर रही है मोदी सरकार
मोदी सरकार ने इस कंपनी रिलायंस को प्रस्तावित किया जिसके साथ दसॉल्ट ने डील पूरी की।
राफेल डील पर फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति का बड़ा बयान आने के बाद विपक्षी पार्टियों ने मोदी सरकार पर हमला बोलना शुरू कर दिया है। सीपीआई (एम ) के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा है कि राफेल डील एक घोटाला है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने देश से झूठ बोलकर देशवासियों को गुमराह किया है।
सीपीआई (एम) के नेता ने कहा कि मोदी सरकार कॉरपोरेट घराने के लिए काम कर रही है। इसके लिए वह उन कंपनियों को भी रक्षा सौदों का जिम्मा दे रही है, जिनके पास इस क्षेत्र का कोई अनुभव नहीं है।
This #Rafale deal is a scam if there was one. The Modi govt has lied and misled Indians. The whole truth must come out now. Why was the Indian government batting for one corporate house with no experience in defence manufacture? #Cronyism #Corruption #Scam https://t.co/ilgrFeL69Y
— Sitaram Yechury (@SitaramYechury) September 21, 2018
गौरतलब है कि राफेल मुद्दे पर लगातार सफाई पेश कर रही बीजेपी को बड़ा झटका लगा है। फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने कहा है कि भारत ने राफेल डील के लिए रिलायंस को पेश किया था जिसके कारण उसे रिलायंस के साथ ही यह डील करनी पड़ी।
मीडियापार्ट से बातचीत में फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ने कहा है कि हमारे पास इस मामले में बोलने के लिए कुछ नहीं है। भारत सरकार ने इस कंपनी रिलायंस को प्रस्तावित किया जिसके साथ दसॉल्ट ने डील पूरी की। हमारे पास दूसरा कोई विकल्प मौजूद नहीं था।
गौरतलब है कि मोदी सरकार यह दावा करती रही है कि दसॉल्ट ने खुद ही रिलायंस को डील के लिए चुना था, इसमें भारत सरकार का कोई हाथ नहीं था। सरकार ने कहा था कि इस डील में भारतीय रक्षा मंत्रालय का कोई हाथ नहीं था। फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति का बयान सामने के बाद इस मामले पर मोदी सरकार की सच्चाई सामने आ गई है।
इससे पहले मोदी सरकार ने कहा था कि हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड राफेल विमानों के निर्माण में सक्षम नहीं था। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि पिछली यूपीए सरकार ने हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को इस डील से बाहर कर दिया था।
अब फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ओलांद का बयान सामने आने के बाद यह लगभग साबित हो गया है कि मोदी सरकार ने राफेल डील में अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस को मदद पहुंचाने की कोशिश की है।