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एकता का संदेश देने वाली ‘स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी’ क्यों बन रही गिरफ़्तारियों की वज़ह?

आदिवासी समाज के नेताओं द्वारा विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया गया है, जिसमें 75,000 से अधिक लोगों के शामिल होने की बात कही जा रही है.

एक ओर जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरदार पटेल की विश्व की सबसे ऊंची मूर्ति ‘स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी’ का अनावरण करेंगे तो दूसरी ओर स्थानीय आदिवासी इसके विरोध में गांव के गांव बंद रखेंगे. गुजरात के केवड़िया में सरदार सरोवर बांध के पास बनी यह मूर्ति अपने विचारों के उलट माहौल पैदा कर रही है. यह एकता के संदेश देने के जगह नाराज़गी का कारण बनी हुई है.

इस विरोध को देखते हुए पुलिस ने कई लोगों को अपने हिरासत में ले लिया है. बीबीसी हिंदी की एक रिपोर्ट में आदिवासी नेता आनंद मझगांवकर ने दावा किया है कि लगभग 90 लोगों को स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी के पास के इलाक़े हिरासत में लिया गया है.

ग़ौरतलब है कि 22 गांव के लोगों ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर पहले ही सूचित कर दिया है कि वे उनका स्वागत नहीं करेंगे. वे इस समारोह का बहिष्कार करेंगे.

‘स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी’ को लेकर आदिवासी समाज की क्यूं है नाराज़गी

नर्मदा नदी के किनारे खेती-किसानी कर रहे आदिवासियों को बहुत सारी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है. आदिवासी किसानों की नाराज़गी है कि सरकार उनकी समस्याओं को नज़रअंदाज़ कर रही है. कई लोगों का मानना है कि प्रतिमा बनाने पर ख़र्च की गई राशि को इन इलाक़ों के विकास पर ख़र्च की जा सकती थी, जिसकी बहुत ज़रूरत है.

ग़ौरतलब है कि इन इलाकों में गन्ना किसानों को चीनी मिलों द्वारा बकाये का भुगतान नहीं किया गया है. किसानों का कहना है कि जिन चीनी मिलों ने उनकी फसल खरीदी थी, वे बंद हो चुकी हैं. उनका पैसा अबतक नहीं मिला है.

बीबीसी की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक नर्मदा नदी के नज़दीकी होने के बावज़ूद भी इन इलाक़ों के खेतों में पानी नहीं पहुंच पा रहा. किसानों को या तो मानसून पर निर्भर रहना पड़ रहा है या पंपसेट से फसल की सिंचाई करनी पड़ रही है. पानी की समस्या भी इस इलाक़े के किसानों के लिए बड़ा मुद्दा है. किसानों का कहना है कि हज़ारों करोड़ की मूर्ति तैयार करने से अच्छा होता कि सरकार सूखा पीड़ित किसानों के लिए पानी की व्यवस्था कर देती.

विरोध में आदिवासी नेताओं का बंद का आह्वान

एक तरफ़ प्रधानमंत्री मोदी लौह पुरुष के प्रतिमा का अनावरण कर रहे होंगे, तो दूसरी ओर प्रतिमा के आसपास के गांव के हज़ारों आदिवासी आह्वान किए गए बंद में शामिल हो रहे होंगे. फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक तकरीबन 75,000 आदिवासी इस प्रतिमा के अनावरण के विरोध में बुलाए गए बंद में हिस्सा लेंगे. द वायर के मुताबिक आदिवासी नेता प्रफुल्ल वसावा का कहना है, ‘आदिवासी के रूप में हमारे अधिकारों का सरकार ने उल्लंघन किया है. हम गुजरात के महान पुत्र सरदार पटेल के खिलाफ नहीं हैं. उनका सम्मान किया जाना चाहिए. हम विकास के भी खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इस सरकार का विकास का विचार एकतरफ़ा है और आदिवासियों के खिलाफ है.’

विरोध को देखते हुए गिरफ़्तारियां

प्रदर्शन की आशंका को आधार बनाकर पुलिस ने कई गिरफ़्तारियां की है. आमलेठा थाना क्षेत्र में पांच लोगों को हिरासत में लिया गया है. बीबीसी के अनुसार आमलेठा थाना के प्रभारी ने बताया, ‘हमें जानकारी मिली थी कि लोग प्रदर्शन करने वाले हैं, इस आधार पर हमने उन्हें हिरासत में ले लिया है.’ कई आदिवासी नेताओं का कहना है कि भारी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया है, लेकिन उन्हें कहां रखा गया है इस बात की कोई जानकारी नहीं है.

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