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स्वच्छता के मामले में फ़ेल हुआ बनारस, क्योटो बनाने का सपना भी जुमला निकला

छह महीने पहले वाराणसी को उत्तर प्रदेश का सबसे साफ शहर घोषित किया गया था. लेकिन ताजा आंकड़ों ने वाराणसी की सफाई की पोल खोल दी है.

स्वच्छ भारत 2019 के सर्वे से पहले ही प्रधानमंत्री मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी स्वच्छता के मामले में नाकाम साबित हुआ है. हाल ही में हुए राज्य स्तरीय स्वच्छ वॉर्ड प्रतियोगिता में इस बात का खुलासा हुआ है.

जनसत्ता की रिपोर्ट के अनुसार राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के 90 वॉर्डों में से एक भी स्थान पर वाराणसी का नाम शामिल नहीं हो पाया है. वहीं राज्य के चार सबसे स्वच्छ ज़िलों में गाजियाबाद, प्रयागराज, फर्रुखाबाद और झांसी का नाम सामने आया है.

छह महीने पहले वाराणसी को उत्तर प्रदेश का सबसे साफ शहर घोषित किया गया था. लेकिन ताजा आंकड़ों ने वाराणसी की सफाई की पोल खोल दी है. नगर निगम ने इस प्रतियोगिता में उत्तर प्रदेश के सभी ज़िलों को 10 मानदंडों के आधार पर मापा था. जिसमें ठोस कचरे का प्रबंधन, आधारभूत ढांचे का विकास, शौचायल, हरियाली जैसे पैमानों को शामिल किया गया था.

25 दिसंबर को लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान स्वच्छता सूची में साफ पाए गए ज़िलों को सम्मानित किया गया था. ग़ौरतलब है प्रधानमंत्री मोदी का संसदीय क्षेत्र ही स्वच्छ ज़िलों की सूची में अपना स्थान नहीं बना पाया है. जबकि साल 2017-18 के राज्य स्तरीय सर्वेक्षण में वाराणसी को सबसे साफ घोषित किया गया था.

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