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आधार की अनिवार्यता ने ली जान, आधार नहीं होने पर रात भर स्ट्रेचर पर तड़पती रही गर्भवती महिला

परिवारवालों का आरोप – आधार नहीं होने के कारण अस्पताल में नहीं किया गया भर्ती, अस्पताल प्रशासन को इस मामले की जानकारी ही नहीं

देश में आधार की अनिवार्यता अब जीने-मरने की वजह बन गई है। सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले और यूआईडीएआई के दिशानिर्देश के बावजूद व्यक्ति की बुनियादी सुविधाएं भी आधार से रेगुलेट हो रही हैं। इधर कई राज्यों में ऐसी घटनाएं घटीं जिसमें व्यक्ति की मौत की वजह आधार की अनिवार्यता ही बना।

ताज़ा मामला उत्तरप्रदेश के हरदोई ज़िले का है। ज़िले के हरदयालपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रशासन पर कथित आरोप लगे हैं कि आधार कार्ड न होने की वजह से एक गर्भवती महिला को अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया जिसके कारण उसकी मौत हो गई। परिवार के आरोप को लेकर मामले की जांच चल रही है।

गौरतलब है कि अमर उजाला की एक रिपोर्ट के द्वारा यह मामला सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, फर्रूखाबाद में मऊदरवाजा थाना क्षेत्र के ऊगरपुर गांव के तोताराम की 21 वर्षीय पत्नी संता जो कि गर्भवती थी अपने मायके हरदोई ज़िले के लोनार कोतवाली के बरसोहिया गांव आई थी।

बीते 7 सितंबर को प्रसव पीड़ा के बाद उसे हरदयालपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था। अस्पताल के कर्मचारियों ने इलाज के लिए गर्भवती महिला का आधारकार्ड मांगा। परिवार वालों का आरोप है कि आधार कार्ड न होने की बात बताने पर कर्मचारियों ने महिला को भर्ती कराने से मना कर दिया।

अमर उजाला के अनुसार महिला के पिता संतपाल ने बताया कि यदि अस्पताल वाले उनकी बेटी को भर्ती कर लेते तो जान बच जाती। उनकी बेटी रात भर स्ट्रेचर पर ही तड़पती रही।

अजीब बात यह है कि जब इस मामले को लेकर अख़बार के रिपोर्टर ने अस्पताल प्रशासन से बात की तो उन्होंने इस मामले से ही अनभिज्ञता ज़ाहिर की। सीएमओ ने कहा कि ऐसा मामला संज्ञान में नहीं है। मामले का पता लगाकर जांच की जाएगी।यदि कोई दोषी होगा तो उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई होगी।

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