May a good source be with you.

PM-KISAN योजना की चुनौती: चुनाव से पहले योजना का मात्र 20 फ़ीसदी ही खर्च कर पाएगी मोदी सरकार

इस योजना को सरकार ने पीछे की तारीख़ यानी 1 दिसंबर 2018 की तिथि से लागू किया.

मोदी सरकार द्वारा शुरू किया गया प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना अपने कुल लक्ष्य का मात्र 20 फीसदी हिस्सा ही इस वित्तीय साल में खर्च कर पाएगी. इसका कारण है कि देश में जमीन के रिकॉर्ड और आधार का बैंक खाते से लिंक होना अभी भी दूर की कौड़ी है.

डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट के अनुसार विस्तृत भूमि रिकॉर्ड की कमी सरकार की इस योजना की राह में बड़ी बाधा है. बता दें कि 1 फरवरी 2019 को वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने बजट पेश करते हुए भूमिहीन किसान परिवारों को हर साल 6000 रुपए देने की घोषणा की. इस फ़ैसले को लोकसभा चुनाव के पहले मोदी सरकार का मास्टर स्ट्रोक बताया गया.

इस योजना को सरकार ने पीछे की तारीख़ यानी 1 दिसंबर 2018 की तिथि से लागू किया. सरकार ने 2 हेक्टेयर से कम जमीन वाले हर किसान परिवार को चालू वित्त वर्ष में 2000 रुपए देने की योजना बनाई है. वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने इस योजना के लिए 20,000 करोड़ रुपए निर्धारित किए हैं, जिससे 12 करोड़ छोटे और सीमांत किसानों को लाभ मिलने का लक्ष्य रखा गया है. हालांकि सरकार के सूत्रों का कहना है कि चालू वित्त वर्ष में मुश्किल से 3,500 करोड़ रुपए ही मार्च तक खर्च किए जा सकेंगे. इसके बाद चुनाव आयोग आदर्श आचार संहिता लागू कर देगा.

सरकार की इस योजना में सबसे बड़ी बाधा जमीनों का पर्याप्त डाटा उपलब्ध ना होना है. 2015-16 के कृषि सेंशस के अनुसार 86.2 प्रतिशत जमीन सीमांत या छोटे किसानों के हिस्से में है. लेकिन, ये जमीन भारत के कुल फसलीय भूमि का 47.3 प्रतिशत (157.43 मिलियन हेक्टेयर) हैं. इस प्रकार देश के करीब 12 करोड़ 60 लाख छोटे और सीमांत किसानों के पास 74.4 मिलियन हेक्टेयर जमीन है.

अब सवाल यह है कि सरकार की यह योजना किसानों के पास पहुंचेगी कैसी? कारण है कि जमीन का रिकॉर्ड रखने में देश के राज्यों में एकरूपता नहीं है. बैंक खाते को आधार से लिंक करने में भी राज्यों का रिकॉर्ड अच्छा नहीं है.

कर्नाटक, केरल और पश्चिम बंगाल के किसान इस योजना का लाभ ले सकते हैं, क्योंकि इन राज्यों ने जमीन का रिकॉर्ड रखने और आधार से बैंक खाते को जोड़ने में अच्छा ट्रैक रिकॉर्ड बनाया है. अधिकारियों के मुताबिक पश्चिम बंगाल जैसे राज्य ने बटाइदारों का भी रिकॉर्ड रखा है. बिहार, झारखंड और पूर्वोत्तर के राज्यों का ट्रैक रिकॉर्ड इन मामलों में सबसे बुरा है. एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक सरकार 31 मार्च के पहले इस योजना को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए बैठकें कर रही है. कृषि व किसान कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि लोकसभा चुनाव में उतरने से पहले सरकार का यह कदम राजनीति के लिहाज़ से काफ़ी महत्वपूर्ण है.

वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने वित्त वर्ष 2019-20 में इस योजना के लिए 75,000 करोड़ रुपए खर्च करने का लक्ष्य रखा है. इसे जुलाई, नवंबर और मार्च महीने के तीन किस्तों में बांटा जाएगा. जो किसान परिवार आयकर देते हैं, जिनके घर में सरकारी नौकरी है, पट्टेदार किसान और बटाईदारों को इस योजना के लाभ से अलग रखा गया है.

एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि सरकार के पास इस योजना को लागू करने के लिए काफी कम समय बचा है. फरवरी का महीना तो संसद की सहमति लेने में ही बर्बाद हो जाएगा. इस प्रकार सरकार के पास पैसे बांटने के लिए मात्र मार्च भर का समय बचा है. अब भाजपा के लिए एक चुनौती है कि वह कैसे जनता को उम्मीद दिला सके कि अगली सरकार बनने के बाद पैसे बांटे जाएंगे.

You can also read NewsCentral24x7 in English.Click here
+