PM-KISAN योजना के लाभार्थी के साथ धोखा, किसान के खाते में 2000 रुपए डालकर फिर वापस ले गई बैंक
नासिक के एक किसान के बैंक खाते में जो पैसे सरकार ने भेजे, उसे बैंक ने कुछ घंटे बाद ही वापस ले लिया.
प्रधानमंत्री मोदी की महत्वाकांक्षी पीएम-किसान (प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि) योजना ने अपने शुरुआत के कुछ ही घंटे के भीतर अपने एक लाभार्थी को चूना लगाया है. नासिक के एक किसान के बैंक खाते में जो पैसे सरकार ने भेजे, उसे बैंक ने कुछ घंटे बाद ही वापस ले लिया.
24 फरवरी को इस योजना की शुरुआत की गई थी. लोकमत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार नासिक के 8000 किसानों के बैंक खातों में 2000 रुपए की राशि भेजी गई थी. इनमें से अशोक लहगामे नाम के एक लाभार्थी के पास बैंक से मैसेज आया कि उनके पैसे वापस ले लिए गए हैं. लोकमत टाइम्स से बातचीत में अशोक ने कहा है, “रविवार को 10 बजे मेरे मोबाइल में मैसेज आया कि मेरे बैंक खाते में 2000 रुपए जमा किए गए हैं, लेकिन शाम साढ़े तीन बजे के करीब दूसरा मैसेज आया जिसमें लिखा था कि मेरे पैसे बैंक ने वापस ले लिए हैं. इसके बाद सोमवार को मैं बैंक गया, जहां बैंककर्मियों ने मेरी सहायता नहीं की. बैंक वाले ने मुख्य शाखा से संपर्क करने की सलाह दे डाली.”
बता दें कि इस योजना की घोषणा अंतरिम बजट सत्र में सरकार ने की थी. प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को इसका शुभारंभ किया. इस बात का अंदाजा लगाया जा रहा था कि लोकसभा चुनाव के कारण सरकार इसे लागू करने में जल्दबाज़ी कर रही है, जिसमें आदर्श आचार संहिता को अनदेखा किया जा रहा है.
नासिक के जिला कलक्टर ने लोकमत टाइम्स को कहा, “प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के योग्य लोगों की सूची तैयार की गई थी और उसे गांवों में सत्यापन के लिए प्रकाशित भी किया गया था. अगर किसी भी किसान का नाम इस सूची में है, तो निश्चित रूप से उसे पैसे भेजे जाएंगे. इस मामले में (संजय लाहगामे) तकनीकी कारणों पर मैं विचार करूंगा. अगर वह इसके लिए योग्य हैं, तो निश्चित तौर पर उन्हें पैसे मिलेंगे. इस मामले में अगले एक-दो दिनों में ही कुछ साफ़ तस्वीरें सामने आ पाएंगी.
किसान सभा के प्रदेश सचिव डॉ. अजीत नावले ने लोकमत टाइम्स से बताया कि इस तरह के अन्य मामले भी सामने आए हैं. उन्होंने कहा, “किसानों के पैसे बैंकों द्वारा वापस ले लिए जाने की ख़बरें कई जगहों से आ रही हैं. यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण मामला है. इससे किसानों का अपमान हुआ है. इस योजना ने किसानों को कोई राहत नहीं दी, बल्कि इसके उलट उन्हें मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया जा रहा है.