“आशा” को निराशा: पटना की सड़कों पर बैठी रही 40 हजार महिलाएं, CM नीतीश को नहीं लगी भनक
दो दिनों तक चले इस विरोध प्रदर्शन पर सरकार की तरफ़ से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
बिहार की करीब 60 हजार आशा कार्यकर्ता बीते 1 दिसंबर से अपनी 12 सूत्री मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं. 13 और 14 दिसंबर को बिहार राज्य आशा कार्यकर्ता संघ, आशा संघर्ष समिति और आशा कर्मी संघ ने आशा संयुक्त संघर्ष मंच के अधीन एक साथ आकर पटना के गर्दनीबाग में हड़ताल पर रहे, लेकिन सरकार की तरफ़ से किसी प्रतिनिधि ने इनसे संपर्क नहीं किया.
बिहार राज्य आशा कार्यकर्ता संघ की अध्यक्ष शशि यादव का कहना है कि दो दिनों तक चले इस विरोध प्रदर्शन पर सरकार की तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई जिसके कारण हम अपने आंदोलन को जारी रखेंगे और आने वाले दिनों में यह और भी उग्र होगा. उनका कहना है कि 16 दिसंबर से राज्य के सभी प्रखंडों में स्वास्थ्य मंत्री का पुतला फूंका जाएगा और 18 दिसंबर से प्रदर्शन को उग्र बनाते हुए अस्पतालों की आपात सेवा भी ठप की जाएगी.
शशि यादव का कहना है कि बीते 11 दिसंबर को बिहार सरकार की ओर से कार्यपालक निदेशक ने आशा प्रतिनिधियों से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री अभी विदेश दौरे पर हैं और प्रधान सचिव उनके साथ गए हैं. ऐसे में उनके लौटने पर ही इस मामले में कुछ किया जा सकता है. कार्यपालक निदेशक का कहना है कि उनकी पहुंच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास नहीं है इसलिए वे आशा की बात को सीएम के पास नहीं पहुंचा सकते.
क्या है आशा कार्यकर्ताओं की मुख्य मांगें
1. आशा कार्यकर्ताओं को सरकारी सेवक घोषित किया जाए. उन्हें 18,000 रुपए प्रति माह दिया जाए. आशा फैसिलिटेटर को मिलने वाले मानदेय में बढ़ोतरी की जाए.
2. क. योग्य आशा के ट्रेनिंग के लिए नर्सिंग स्कूल में 50 फ़ीसदी सीट रिज़र्व किया जाए.
ख. प्रशिक्षण देने के बाद आशा को ए.एन.एम के पद पर बहाल किया जाए.
ग. योग्य आशा फैसिलिटेटरों को प्रखंड सामुदायिक समन्वयक यानी बीसीएम के पदों पर बहाल किया जाए.
घ. नवनियुक्त आशाओं का प्रशिक्षण जल्द से जल्द किया जाए.
3. आशा फैसिलिटेटरों को अप्रैल 18 से तय 5000 रुपए और अक्टूबर 2018 से तय 6000 रुपए मानदेय का भुगतान किया जाए.
4. आंदोलन में चयनमुक्त की गई आशा कार्यकर्ताओं को फिर से बहाल किया जाए.
आंदोलन से क्या पड़ा है असर
इस हड़ताल के कारण प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित है. गांवों में टीकाकरण से लेकर जिला सदर अस्पताल के कई कामों पर इसका असर पड़ रहा है. पूर्वी चम्पारण जिले के चिरैया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के लिपिक का कहना है कि हड़ताल के कारण इस अस्पताल के सारे कार्य ठप पड़े हैं. टीकाकरण से लेकर बंध्याकरण तक का काम बाधित है. वहीं मोतिहारी सदर प्रखंड के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. श्रवण कुमार पासवान का कहना है कि इस हड़ताल के कारण जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है.
जिला स्तर पर अधिकारियों की क्या है प्रतिक्रिया
पूर्वी चंपारण जिले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सभा होनी है. सिविल सर्जन डॉ. बी. के सिंह का कहना है कि हमलोग कोशिश कर रहे हैं कि उस सभा से पहले इस हड़ताल को समाप्त करा दिया जाए. इधर, चिरैया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रखंड चिकित्सा प्रबंधक का कहना है कि सिविल सर्जन ने आदेश दिया है कि आंदोलनरत आशा कार्यकर्ताओं पर एफ़आईआर दर्ज़ की जाए. एक अन्य चिकित्सा पदाधिकारी ने भी इस बात की पुष्टि की है कि आंदोलन के दौरान किसी भी हंगामे को देखते हुए सिविल सर्जन ने आशा फ़ैसिलिटेटरों पर एफ़आईआर दर्ज़ करने का आदेश भेजा है.
इस आंदोलन को मीडिया में कितना मिला स्पेस
दैनिक जागरण के पटना संस्करण को इस आंदोलन की कोई जानकारी नहीं है. अख़बार में इस प्रदर्शन को लेकर कोई ख़बर 14 दिसंबर के अंक में नहीं लगी है.
हिन्दुस्तान के पटना नगर संस्करण ने आठवें पन्ने पर पांच कॉलम की ख़बर छापी है.
प्रभात ख़बर के पटना संस्करण ने सातवें पन्ने पर चार कॉलम की ख़बर लिखी है. ख़बर के आधे हिस्से में आंदोलनरत आशा कार्यकर्ताओं की फ़ोटो लगी है.