न कलक्टरी रही और न विधायक ही बन पाए- अब क्या फिर से यूपीएससी की तैयारी में जुटेंगे ओपी चौधरी?
आईएएस की नौकरी छोड़कर चुनाव लड़े ओमप्रकाश चौधरी को भाजपा का दामन थामना महंगा पड़ा. उन्हें छत्तीसगढ़ की खरसिया सीट से हार का सामना करना पड़ा है.
न कलक्टरी रही और न विधायक ही बन पाए. आईएएस की नौकरी छोड़कर चुनाव लड़े ओमप्रकाश चौधरी को भाजपा का दामन थामना महंगा पड़ा. उन्हें छत्तीसगढ़ की खरसिया सीट से हार का सामना करना पड़ा है. कांग्रेसी उम्मीदवार उमेश पटेल ने इस सीट पर बाजी अपने हाथ मार ली है.
गौरतलब है कि ओपी चौधरी 2005 बैच के आईएएस अधिकारी रहे हैं. उन्होंने विधायकी चुनाव लड़ने के लिए बीते 25 अगस्त को अपने पद से इस्तीफा दिया था. नौकरी छोड़ने से पहले वे रायपुर में कलक्टर थे. युवाओं की बीच काफ़ी लोकप्रिय भी हैं.
खरसिया ‘अगसिया’ समुदाय बहुल सीट, फिर भी ओपी चौधरी की हार
छत्तीसगढ़ की खरसिया विधानसभा क्षेत्र में अगसिया समुदाय के ज़्यादातर वोटर है. इसी समुदाय से ओपी चौधरी भी आते हैं. लेकिन फिर भी पूर्व आईएस अधिकारी को हार का सामना करना पड़ा है. दरअसल, उमेश पटेल उस कांग्रेस के कद्दावर नेता नंदकुमार के बेटे हैं, जो झीरम घाटी हमले में शहीद हो गए थे. खरसिया का यह सीट इस परिवार का पारंपरिक सीट माना जाता है.